AAP में महाविस्फोट: 7 राज्यसभा सांसदों ने छोड़ी पार्टी, BJP ने कहा- ‘अभी और बहुत कुछ होना बाकी, मान ने राष्ट्रपति से मांगा समय
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 25 अप्रैल 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए राजनीतिक संकट गहरा गया है। पार्टी की कुल 10 राज्यसभा सीटों में से 7 सांसदों ने सामूहिक रूप से पार्टी छोड़ दी और भाजपा में विलय (मर्जर) कर लिया। तीन सांसदों — राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल — ने तुरंत भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पार्टी जॉइन कर ली, जबकि बाकी चार (स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी) ने लिखित सहमति जताई।
यह दलबदल दल-बदल विरोधी कानून की 10वीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई बहुमत (7/10) के आधार पर हुआ, इसलिए इन सांसदों पर अयोग्यता का खतरा नहीं है। AAP अब राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसदों (संजय सिंह, बलवीर सिंह सीचेवाल और एनडी गुप्ता) तक सिमट गई है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का बड़ा बयान
पश्चिम बंगाल के बारानगर में रोड शो के दौरान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (नितिन गडकरी/नबीन) ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है। आगे आगे देखिए होता है क्या।”
यह बयान AAP में और बगावत की संभावना की ओर इशारा कर रहा है। तीन सांसदों ने भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात कर औपचारिक रूप से विलय की घोषणा की।
सांसदों के आरोप और AAP पर हमला
बगावत करने वाले सांसदों ने AAP पर गंभीर आरोप लगाए:
पार्टी भ्रष्टाचार और केजरीवाल परिवार के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
मूल विचारधारा (ईमानदार राजनीति) से भटक गई।
स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के आवास पर हमले, महिला विरोधी व्यवहार और संसद में बोलने का मौका न देने का आरोप लगाया।
राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी में अब “ईमानदार राजनीति खत्म” हो गई है।
भाजपा ने इन नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह AAP की अंदरूनी कलह और विचारधारा की दिवालियापन का प्रमाण है।
AAP और भाजपा में बयानबाजी तेज
AAP ने इसे ‘ऑपरेशन लोटस’ और भाजपा की साजिश बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि ED-CBI का दुरुपयोग कर भाजपा विपक्षी दलों को तोड़ रही है। AAP ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है, हालांकि कानूनी रूप से यह मुश्किल है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सांसदों (खासकर पंजाब से जुड़े) को “पंजाब के गद्दार” बताया।
भगवंत मान राष्ट्रपति से मिलेंगे
इस बीच, पंजाब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा है। वे पंजाब के कुछ विधायकों के साथ राष्ट्रपति से मिलकर इन राज्यसभा सांसदों को रिकॉल (Recall) करने का मुद्दा उठाएंगे। पंजाब में AAP की सरकार है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह फूट पार्टी के लिए बड़ा संकट है।
राजनीतिक प्रभाव
राज्यसभा में भाजपा की संख्या बढ़कर 113 हो गई, जबकि विपक्ष कमजोर हुआ।
पंजाब में AAP सरकार पर कोई सीधा असर नहीं, लेकिन 2027 चुनाव से पहले संगठनात्मक क्षति बड़ी है।
यह घटना भारतीय राजनीति में थोक दलबदल (mass merger) की नई मिसाल बन गई है।
AAP अब दिल्ली और पंजाब दोनों जगहों पर अपनी एकता बचाने की चुनौती से जूझ रही है। केजरीवाल पक्ष की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया आना बाकी है।
यह विकास दिल्ली-पंजाब की राजनीति को और गरमा देगा। जनता इन आरोप-प्रत्यारोप और बड़े दलबदल को कैसे देखती है, यह 2027 के चुनावों में साफ होगा।
