अन्तर्राष्ट्रीय

​’इमिग्रेशन हमारा फैसला, कोर्ट का नहीं’: ट्रंप प्रशासन ने अदालत की शक्तियों को दी खुली चुनौती

वाशिंगटन, 25 अप्रैल 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में सख्त इमिग्रेशन नीतियों पर कानूनी लड़ाई चरम पर पहुंच गई है। ट्रंप प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण मामलों में संघीय अदालतों से साफ कहा है कि इमिग्रेशन नीति और कार्यकारी फैसलों पर अदालतों को कोई अधिकार (jurisdiction) नहीं है। प्रशासन का तर्क है कि ये फैसले राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्ति (executive authority), विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं, इसलिए अदालतें इनमें दखल नहीं दे सकतीं।

ट्रंप प्रशासन का मुख्य तर्क

ट्रंप प्रशासन के वकीलों (Justice Department) ने अदालतों में बार-बार यह दलील दी है:

कांग्रेस ने इमिग्रेशन के कई फैसलों (जैसे TPS — Temporary Protected Status समाप्त करना, asylum rules, deportation policy) को Secretary of Homeland Security या राष्ट्रपति के विवेक पर छोड़ दिया है।

अदालतें इन discretionary decisions की समीक्षा नहीं कर सकतीं।

राष्ट्रपति की विदेश नीति और सीमा सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर judicial review सीमित या नामुमकिन है।

यह रुख कई मामलों में सामने आया है, जैसे:

सीमा पर asylum (शरण) पर लगाए गए प्रतिबंध

TPS (अस्थायी संरक्षण) समाप्त करने के फैसले (इथियोपिया, हैती, वेनेजुएला आदि देशों के लिए)

Mandatory detention policy (बिना बॉन्ड सुनवाई के हिरासत)

Remain in Mexico जैसे पुराने कार्यक्रमों को फिर शुरू करना

हालिया उदाहरण

Asylum Ban पर झटका: हाल ही में एक अपील अदालत (DC Circuit) ने ट्रंप के सीमा पर शरण प्रतिबंध को अवैध बताते हुए रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि इमिग्रेशन कानून लोगों को शरण मांगने का अधिकार देते हैं, राष्ट्रपति इसे पूरी तरह नहीं रोक सकते।

TPS और अन्य protections: कुछ जजों ने प्रशासन के फैसले को “pretextual” (बहाना) बताया और रोका, जबकि प्रशासन ने दावा किया कि अदालतों को इनमें दखल देने का कोई अधिकार नहीं।

Detention Policy: कुछ अपील अदालतों (Fifth और Eighth Circuit) ने प्रशासन का समर्थन किया और कहा कि इमिग्रेशन जजों को mandatory detention में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

ट्रंप प्रशासन ने कई बार कहा है कि निचली अदालतों के “nationwide injunctions” (पूरे देश में लागू रोक) से “judicial chaos” हो रहा है और ये कार्यकारी शक्ति में अनुचित दखल हैं।

विवाद क्यों इतना तीखा?

ट्रंप की इमिग्रेशन एजेंडा बहुत आक्रामक है — बड़े पैमाने पर deportation, सख्त asylum rules, sanctuary cities पर कार्रवाई और सीमा सुरक्षा। प्रशासन इसे “rule of law” बहाल करने का नाम दे रहा है, जबकि विरोधी (Democrats, immigrant rights groups और कुछ जज) इसे असंवैधानिक और क्रूर बता रहे हैं।

अब तक सैकड़ों मामले अदालतों में हैं। कुछ में ट्रंप प्रशासन को राहत मिली है (Supreme Court ने कई बार stay दिया), लेकिन कई निचली अदालतों ने नीतियों पर रोक लगा दी है।

आगे क्या?

यह लड़ाई Supreme Court तक पहुंचने की पूरी संभावना है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रपति की इमिग्रेशन शक्ति पर अदालतों का अत्यधिक हस्तक्षेप लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है। वहीं, आलोचक कहते हैं कि कोई भी राष्ट्रपति कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

यह मुद्दा न सिर्फ अमेरिकी राजनीति को विभाजित कर रहा है, बल्कि लाखों प्रवासियों के भविष्य को भी प्रभावित कर रहा है। आने वाले हफ्तों-महीनों में और बड़े फैसले आने की उम्मीद है, जो ट्रंप के पूरे इमिग्रेशन एजेंडे का भविष्य तय करेंगे।

(आंकड़े और घटनाक्रम अप्रैल 2026 तक की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है।)

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