टेक-ऑटो

गैस का सफर: जमीन की गहराइयों से आपकी कार के टैंक तक

प्राकृतिक गैस आज की दुनिया में ऊर्जा का एक स्वच्छ और शक्तिशाली विकल्प बनकर उभरी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जमीन के हजारों फीट नीचे से निकलने वाली गैस आपके किचन के चूल्हे या कार के टैंक तक कैसे पहुँचती है?

यहाँ गैस के LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) से CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) बनने तक के पूरे सफर का आसान विश्लेषण है।

गैस का सफर: जमीन की गहराइयों से आपकी कार के टैंक तक

प्राकृतिक गैस का सफर मुख्य रूप से तीन बड़े चरणों में बंटा होता है: निकासी (Extraction), परिवहन (Transportation) और वितरण (Distribution)।

1. स्रोत: जमीन के नीचे से पाइपलाइन तक

गैस का सफर वेल्स (Wells) से शुरू होता है। जब कच्चा तेल या गैस निकाली जाती है, तो इसमें अशुद्धियाँ (जैसे पानी, रेत और हीलियम) होती हैं। इसे रिफाइनरी में साफ किया जाता है और फिर पाइपलाइन के जरिए मुख्य स्टेशन तक भेजा जाता है।

2. LNG का बनना (गैस को ‘लिक्विड’ बनाना)

जब गैस को एक देश से दूसरे देश (जैसे कतर से भारत) समुद्र के रास्ते भेजना होता है, तो पाइपलाइन बिछाना मुमकिन नहीं होता। तब इसे LNG में बदला जाता है:

* प्रक्रिया: गैस को -162°C तक ठंडा किया जाता है।

* फायदा: ठंडी होने पर गैस तरल (Liquid) बन जाती है और इसका आयतन (Volume) 600 गुना कम हो जाता है। यानी 600 लीटर गैस अब सिर्फ 1 लीटर के डिब्बे में समा सकती है।

* परिवहन: इसे विशाल इंसुलेटेड जहाजों (Cryogenic Tankers) में भरकर दुनिया भर में भेजा जाता है।

3. री-गैसीफिकेशन (वापस गैस बनाना)

जब LNG जहाज बंदरगाह (जैसे भारत में दाहेज या कोच्चि टर्मिनल) पर पहुँचते हैं, तो इस ठंडे तरल को फिर से गर्म किया जाता है ताकि यह दोबारा गैसीय अवस्था में आ जाए। अब यह गैस मुख्य राष्ट्रीय ग्रिड पाइपलाइनों में डाल दी जाती है।

4. CNG का बनना (गैस को ‘दबाना’)

जब यही प्राकृतिक गैस शहरों के भीतर सीएनजी स्टेशनों तक पहुँचती है, तो इसे CNG में बदला जाता है:

* प्रक्रिया: गैस को बहुत ऊंचे दबाव (करीब 200 से 250 बार) पर कंप्रेस (दबाया) किया जाता है।

* उपयोग: भारी दबाव के कारण यह कम जगह घेरती है, जिससे इसे कारों के छोटे सिलेंडरों में भरा जा सकता है।

LNG और CNG में मुख्य अंतर

| विशेषता | LNG (Liquefied Natural Gas) | CNG (Compressed Natural Gas) |

| अवस्था | तरल (Liquid) | गैस (Gaseous) |

| तापमान | बहुत ठंडा (-162°C) | सामान्य तापमान |

| उपयोग | लंबी दूरी के परिवहन और उद्योगों के लिए | वाहनों और लोकल ट्रांसपोर्ट के लिए |

| स्टोरेज | क्रायोजेनिक टैंक की जरूरत | हाई-प्रेशर सिलेंडर की जरूरत |

5. PNG: आपके किचन तक का सफर

जब यही गैस बिना कंप्रेस किए (कम दबाव पर) पाइपों के जरिए सीधे आपके घर के चूल्हे तक पहुँचती है, तो इसे PNG (Piped Natural Gas) कहते हैं। यह एलपीजी सिलेंडर के मुकाबले सुरक्षित और सस्ती होती है।

प्रो टिप: प्राकृतिक गैस रंगहीन और गंधहीन होती है। रिसाव (Leak) का पता लगाने के लिए इसमें ‘मरकैप्टन’ (Mercaptan) नाम का केमिकल मिलाया जाता है, जिससे इसमें से खास तरह की गंध आती है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *