ईरान वॉर की आंच में झुलसा पाकिस्तान: क्या जनरल मुनीर का दांव उल्टा पड़ गया?
पाकिस्तान के भीतर इस समय जबरदस्त सांप्रदायिक तनाव और राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल है। ईरान-इजरायल युद्ध और हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु के बाद उपजे हालातों ने पाकिस्तान की आंतरिक दरारों को और गहरा कर दिया है।
सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के एक कथित बयान ने जलती आग में घी डालने का काम किया है, जिससे शिया समुदाय में भारी नाराजगी है।
ईरान वॉर की आंच में झुलसा पाकिस्तान: क्या जनरल मुनीर का दांव उल्टा पड़ गया?
इस्लामाबाद: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए एक नया सिरदर्द पैदा कर दिया है। पाकिस्तान, जो पहले से ही आर्थिक कंगाली और आतंकवाद से जूझ रहा है, अब शिया-सुन्नी के बीच गहरी होती खाई के मुहाने पर खड़ा है।
मुनीर का विवादित बयान: “ईरान पसंद है तो वहीं चले जाओ”
हाल ही में रावलपिंडी में एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान जनरल आसिम मुनीर ने शिया धर्मगुरुओं से बातचीत करते हुए एक ऐसी टिप्पणी की, जिसने पूरे देश में बवाल खड़ा कर दिया है। खबरों के मुताबिक, मुनीर ने कहा कि “अगर किसी को ईरान से इतना ही प्यार है, तो वह ईरान चला जाए।”
यह बयान उन विरोध प्रदर्शनों के जवाब में आया था जो ईरान के समर्थन में पाकिस्तान की सड़कों पर हो रहे थे। मुनीर का उद्देश्य यह संदेश देना था कि दूसरे देश के मसलों पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन शिया समुदाय ने इसे अपनी देशभक्ति पर चोट माना है।
विरोध की मुख्य वजहें
* सर्वोच्च नेता की मौत: ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत (जो कि 2026 के घटनाक्रमों के अनुसार दिखाई गई है) के बाद पाकिस्तान के शिया बाहुल्य इलाकों, विशेषकर कराची और गिलगित-बाल्टिस्तान में भारी विरोध प्रदर्शन हुए।
* वफादारी पर सवाल: शिया धर्मगुरुओं का तर्क है कि ईरान के साथ उनका धार्मिक लगाव है, लेकिन उनकी वफादारी पाकिस्तान के साथ है। मुनीर के “ईरान चले जाओ” वाले बयान को अपमानजनक बताया जा रहा है।
* रणनीतिक संतुलन: पाकिस्तान सरकार सऊदी अरब और अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता का एक बड़ा हिस्सा ईरान के प्रति सहानुभूति रखता है।
मुनीर के लिए क्या चुनौतियां हैं?
जनरल मुनीर इस समय कई मोर्चों पर घिरे हुए हैं:
* आंतरिक विद्रोह: सेना के भीतर और बाहर शिया अधिकारियों और नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
* ISI के साथ मतभेद: रिपोर्ट्स बताती हैं कि खुफिया विफलता और ईरान युद्ध के प्रबंधन को लेकर सेना और ISI के बीच भी समन्वय की कमी देखी जा रही है।
* सीमा पर तनाव: ईरान के साथ लगती सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ गई हैं और बलूच अलगाववादी इस स्थिति का फायदा उठा सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय ‘दो नावों की सवारी’ कर रहा है। एक तरफ उसे सऊदी अरब से वित्तीय मदद चाहिए, तो दूसरी तरफ वह ईरान को पूरी तरह नाराज नहीं कर सकता। जनरल मुनीर का सख्त रुख पाकिस्तान को गृहयुद्ध जैसी स्थिति की ओर धकेल सकता है।
