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डिजिटल जनगणना 2026: क्या है पूरा शेड्यूल?

भारत में लंबे समय से प्रतीक्षित जनगणना (Census) को लेकर हलचल तेज हो गई है। कोरोना महामारी के कारण 2021 में टली यह प्रक्रिया अब 2026 से धरातल पर उतरने जा रही है। इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि जाति जनगणना (Caste Census) को लेकर भी इसमें बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

यहाँ इस पूरी प्रक्रिया और नए अपडेट्स की विस्तृत जानकारी दी गई है:

डिजिटल जनगणना 2026: क्या है पूरा शेड्यूल?

भारत की 16वीं जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी। सरकार ने इसे आधुनिक और सटीक बनाने के लिए पूरी तरह डिजिटल रूप देने का निर्णय लिया है।

* पहला चरण (अप्रैल – सितंबर 2026): इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग’ (मकानों की सूची) और ‘हाउसिंग सेंसस’ का काम होगा। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों का डेटा जुटाया जाएगा।

* दूसरा चरण (फरवरी 2027): इसमें जनसंख्या की वास्तविक गणना (Population Enumeration) होगी।

* विशेष क्षेत्र: लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों के लिए जनगणना अक्टूबर 2026 से ही शुरू हो जाएगी।

जाति जनगणना (Caste Census) क्या है और इस बार क्यों अलग है?

जाति जनगणना का अर्थ है देश की आबादी को उनके जातिगत आधार पर गिनना। भारत में आखिरी बार पूर्ण जातिगत डेटा 1931 में जारी किया गया था।

इस बार क्या नया है?

* स्व-गणना (Self-Enumeration): लोग अब खुद पोर्टल या मोबाइल ऐप के जरिए अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

* जाति और उप-जाति: इस बार की जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) और उनकी उप-जातियों का डेटा भी शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।

* डिजिटल सटीकता: डेटा को पेन-पेपर के बजाय मोबाइल ऐप पर दर्ज किया जाएगा, जिससे ‘डेटा प्रोसेसिंग’ में लगने वाला समय कम होगा और नतीजे जल्दी आएंगे।

क्यों जरूरी है जाति जनगणना?

जातिगत आंकड़ों को लेकर विशेषज्ञों और राजनीतिक हलकों में इसके महत्व को लेकर कई तर्क दिए जा रहे हैं:

* सटीक आरक्षण और नीतियां: वर्तमान में आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का आधार पुराने आंकड़े हैं। नई गणना से पता चलेगा कि किस जाति की वास्तविक जनसंख्या कितनी है और उन्हें योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं।

* संसाधनों का सही वितरण: ‘जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी’ के सिद्धांत पर बजट और संसाधनों का आवंटन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

* सामाजिक न्याय: पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी।

जनगणना 2026 के नए नियम और खास बातें

* 31 मापदंड: पहले चरण में मकानों से संबंधित 31 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें पीने के पानी का स्रोत, शौचालय, बिजली, और रसोई ईंधन जैसे विषय शामिल होंगे।

* सीमित प्रश्न: डेटा की गोपनीयता और सरलता बनाए रखने के लिए डिजिटल फॉर्म में प्रश्नों को सीमित और स्पष्ट रखा गया है।

* कानूनी बाध्यता: जनगणना अधिनियम 1948 के तहत प्रत्येक नागरिक को पूछे गए सवालों का सही जवाब देना अनिवार्य है। हालांकि, व्यक्तिगत डेटा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है और इसे किसी भी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाता।

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