वाइब कोडिंग क्या है? सुंदर पिचाई और श्रीधर वेम्बु की बहस में क्यों छाया यह ट्रेंड
वाइब कोडिंग क्या है? सुंदर पिचाई और श्रीधर वेम्बु की बहस में क्यों छाया यह ट्रेंड
टेक वर्ल्ड में ये दिन “Vibe Coding” का जमाना चल रहा है। यह एक नया तरीका है सॉफ्टवेयर बनाने का, जहां आप कोड की लाइन-बाय-लाइन लिखने की बजाय बस अपनी “वाइब” (यानी आइडिया, इरादा या फीलिंग) को नैचुरल लैंग्वेज में बताते हैं, और AI टूल (जैसे Cursor, Replit, Gemini, या Claude) खुद कोड जेनरेट कर देता है।
सरल भाषा में समझें:
पारंपरिक कोडिंग: आप Python, JavaScript आदि में हर कमांड खुद टाइप करते हैं।
वाइब कोडिंग: आप कहते हैं — “एक साधारण टू-डू लिस्ट ऐप बनाओ जिसमें डार्क मोड हो, लोकल स्टोरेज हो और नोटिफिकेशन आए” — और AI सेकंडों में पूरा कोड बना देता है। आप बस “वाइब” देते हैं, कोड खुद बन जाता है।
यह टर्म मूल रूप से OpenAI के को-फाउंडर Andrej Karpathy ने दिया था, जिन्होंने कहा था: “कोड को भूल जाओ, बस वाइब्स को फॉलो करो और AI से बनवाओ।”
सुंदर पिचाई (Google CEO) का पक्ष:
सुंदर पिचाई ने कई इंटरव्यू और पॉडकास्ट में इसे काफी सपोर्ट किया है। उन्होंने कहा:
“यह कोडिंग को बहुत ज्यादा मजेदार और approachable बना रहा है।”
“कोई भी बिना कोडिंग सीखे ऐप्स और वेबसाइट्स बना सकता है, आइडिया को जल्दी प्रोटोटाइप कर सकता है।”
“यह टेक को फिर से एक्साइटिंग बना रहा है, और यह सिर्फ बेहतर होता जाएगा।” (Google for Developers पॉडकास्ट में)
पिचाई खुद “vibe coding” करके फन के लिए वेबपेज बना चुके हैं, और कहते हैं कि Gemini जैसे मॉडल्स इसे और पावरफुल बना रहे हैं। उनका मानना है कि इससे ज्यादा लोग क्रिएटिव काम कर पाएंगे।
श्रीधर वेम्बु (Zoho फाउंडर) का काउंटर:
दूसरी तरफ, Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने इसे काफी क्रिटिसाइज किया है। उनका कहना है:
वाइब कोडिंग से tech debt (तकनीकी कर्ज) बहुत तेजी से बढ़ेगा — कोड जो AI बनाता है, उसे पूरी तरह समझे बिना शिप कर दिया जाता है, जो बाद में सिस्टम को क्रैश कर सकता है।
“कोडिंग मैजिक है, और यह मैजिक लेयर्स में होता है — इसे सिर्फ वाइब्स से रिप्लेस नहीं कर सकते।”
उन्होंने YC (Y Combinator) और vibe coding के हाइप को “time bomb” कहा, क्योंकि मिशन-क्रिटिकल सॉफ्टवेयर (जैसे बैंकिंग, ERP) में यह काम नहीं करेगा।
वेम्बु का फोकस डेप्थ, सस्टेनेबिलिटी और लॉन्ग-टर्म क्वालिटी पर है, न कि सिर्फ फास्ट शिपिंग पर।
क्यों हो रही है यह बहस?
पिचाई का व्यू: डेमोक्रेटाइजेशन — ज्यादा लोग बिल्ड करेंगे, इनोवेशन बढ़ेगा।
वेम्बु का व्यू: सस्टेनेबिलिटी — फ्रेजाइल सिस्टम से इंडस्ट्री क्रैश हो सकती है।
यह ट्रेंड 2025-26 में बहुत तेजी से फैला है, खासकर AI टूल्स के साथ। डेवलपर्स अब “prompt engineering” और “vibe” को मिलाकर काम कर रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि फ्यूचर में दोनों स्किल्स (ट्रेडिशनल + AI-assisted) की जरूरत रहेगी।
तो आप क्या सोचते हैं — वाइब कोडिंग फ्यूचर है या सिर्फ एक ट्रेंड?
