नवरात्रि में अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं! तुरंत करें ये आसान उपाय
नवरात्रि में अखंड ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं! तुरंत करें ये आसान उपाय
चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में घर में अखंड ज्योति जलाना मां दुर्गा की कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है। लेकिन कभी-कभी हवा, घी कम होना या बाती की वजह से ज्योति बुझ जाती है। ज्योतिष और शास्त्रों (दुर्गा सप्तशती, मार्कण्डेय पुराण) के अनुसार यह कोई बड़ा अपशकुन नहीं है — यह सिर्फ भौतिक घटना हो सकती है। महत्वपूर्ण है आपकी श्रद्धा और भाव। पूजा खंडित नहीं होती अगर सही तरीके से दोबारा जलाएं और मां से क्षमा मांगें।
तुरंत क्या करें? (स्टेप-बाय-स्टेप उपाय)
मन शांत रखें — सबसे पहले गहरी सांस लें, डर या नकारात्मक विचार बाहर निकालें। मां दुर्गा का ध्यान करें और मन ही मन कहें: “हे मां, अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा करें।”
साक्षी दीपक जलाएं — तुरंत एक छोटा सा दीपक (साक्षी दीपक) जलाएं और उसे माता के सामने रखें। यह मुख्य ज्योति का “साक्षी” बनेगा।
अखंड ज्योति का पात्र साफ करें — जली हुई बाती (गुल) निकालें, पात्र को अच्छे से साफ करें।
नई बाती लगाएं — नई लंबी और अच्छी क्वालिटी वाली बाती लगाएं, शुद्ध घी भरें (तेल से बेहतर घी माना जाता है)।
साक्षी दीपक से दोबारा जलाएं — मुख्य अखंड ज्योति को साक्षी दीपक की लौ से ही प्रज्वलित करें। (कभी भी माचिस या लाइटर से न जलाएं।)
क्षमा प्रार्थना और मंत्र जाप — हाथ जोड़कर मां से माफी मांगें। इन मंत्रों का जाप करें (11, 21 या 108 बार):
ॐ दुं दुर्गायै नमः (सबसे सरल और प्रभावी)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कृपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥ (दुर्गा सप्तशती से)
साक्षी दीपक को जलने दें — इसे कुछ देर जलने दें, फिर बुझाकर हटा लें।
बुझने से बचाने के टिप्स (अगली बार के लिए)
शुद्ध घी और लंबी बाती इस्तेमाल करें।
हवा से बचाने के लिए कांच या मिट्टी का कवर लगाएं।
घी नियमित चेक करें और कम होने पर तुरंत भरें।
दीपक को स्थिर जगह पर रखें, हवा वाले स्थान से दूर।
शास्त्र कहते हैं कि भाव सबसे बड़ा है। अगर नीयत साफ है और आप सच्चे मन से मां की भक्ति करते हैं, तो छोटी सी चूक आपकी साधना को भंग नहीं करती। मां दुर्गा क्षमा करने वाली हैं — अपराध क्षमापन स्तोत्र पढ़ें अगर मन में ज्यादा चिंता हो।
