ईरान के मिसाइल हमले से कतर का रास लफान गैस हब बुरी तरह प्रभावित, भारत की LNG सप्लाई पर गहरा संकट मंडराया
ईरान के मिसाइल हमले से कतर का रास लफान गैस हब बुरी तरह प्रभावित, भारत की LNG सप्लाई पर गहरा संकट मंडराया
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमला किया, जहां दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) प्लांट स्थित है। इस हमले से वहां “व्यापक क्षति” (extensive damage) हुई है, आग लग गई और उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है।
कतर एनर्जी (QatarEnergy) ने आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि कई LNG सुविधाओं पर मिसाइलें दागी गईं, जिससे बड़े पैमाने पर आग लगी और आगे की क्षति हुई। रास लफान से पहले ही उत्पादन कुछ समय से रुका हुआ था, लेकिन अब यह हमला वैश्विक सप्लाई को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। कतर ने ईरान के सैन्य और सुरक्षा अटैची को निष्कासित कर दिया है और हमले की कड़ी निंदा की है।
यह हमला इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड (दुनिया का सबसे बड़ा गैस रिजर्व) पर हमले के जवाब में किया गया माना जा रहा है। ईरान ने गल्फ देशों के अन्य ऊर्जा ठिकानों पर भी हमले किए हैं, जिसमें सऊदी अरब और UAE शामिल हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। एशियाई LNG कीमतें $26 से ऊपर जा सकती हैं।
भारत पर क्या असर?
भारत अपनी कुल LNG जरूरत का लगभग 40% (कुछ रिपोर्ट्स में 47% तक) हिस्सा कतर से आयात करता है, जो सालाना करीब 2.7 करोड़ टन है। रास लफान हब से भारत की बड़ी खेप आती है। उत्पादन रुकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रूट्स पर खतरे से सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। इससे:
फर्टिलाइजर इंडस्ट्री पर बड़ा असर, क्योंकि यूरिया उत्पादन गैस पर निर्भर है।
पावर सेक्टर, सीएनजी और PNG सप्लाई में कमी।
घरेलू LPG और CNG की कीमतों में उछाल।
इंडस्ट्रीज में उत्पादन कटौती और महंगाई का खतरा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति लंबी चली तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों (जैसे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) से महंगे स्पॉट मार्केट से LNG खरीदना पड़ सकता है, जिससे ऊर्जा बिल बढ़ेगा। सरकार पहले से ही गैस वितरण को प्राथमिकता के आधार पर मैनेज कर रही है, लेकिन लंबे समय तक संकट बने रहने पर पावर कट और इंडस्ट्रियल स्लोडाउन का खतरा है।
यह घटना मिडिल ईस्ट युद्ध के अब ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचने का सबसे बड़ा संकेत है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
