राजनीति

राज्यसभा में 37 सांसदों की भावुक विदाई! पीएम मोदी बोले- “राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, सदन है सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी”

राज्यसभा में 37 सांसदों की भावुक विदाई! पीएम मोदी बोले- “राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, सदन है सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी”

राज्यसभा के ऊपरी सदन में आज (18 मार्च 2026) एक भावुक और ऐतिहासिक पल देखने को मिला। 37 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल अप्रैल से शुरू होने वाले रिटायरमेंट पीरियड के साथ समाप्त हो रहा है। इनमें से कई वरिष्ठ नेता दोबारा चुनाव लड़कर वापस आ सकते हैं, जबकि कुछ नए चेहरे सदन में जगह बनाएंगे। इसी बीच, सदन में इन रिटायरिंग सदस्यों के लिए विशेष विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हिस्सा लिया और सदन को संबोधित किया।

पीएम मोदी का मुख्य संदेश क्या था?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में सदन को “सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी” करार दिया। उन्होंने कहा, “सदन अपने आप में बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है। यहां हमारी शिक्षा होती है और दीक्षा भी। हर सांसद का योगदान महत्वपूर्ण है। नए सदस्यों को वरिष्ठों से सीखना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता है।” मतलब, कार्यकाल खत्म होने के बाद भी राजनीतिक जीवन या राष्ट्रसेवा का सफर जारी रहता है। पीएम ने जोर दिया कि दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर आपसी सम्मान जरूरी है, और रिटायर हो रहे सदस्यों का अनुभव लोकतंत्र की अमूल्य पूंजी है।

किन नेताओं की तारीफ की?

पीएम मोदी ने विशेष रूप से विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, शरद पवार और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा जैसे वरिष्ठ नेताओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की आधी उम्र संसदीय कार्य में बीती है, और उनका अनुभव नए सांसदों के लिए प्रेरणा स्रोत है। सदन में अलग-अलग विचारों के बावजूद सम्मान की भावना बनी रहनी चाहिए।

पूरा संदर्भ क्या है?

राज्यसभा में हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य (लगभग 1/3) रिटायर होते हैं।

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कुल 59 सदस्य रिटायर हो रहे हैं (20 राज्यों से), लेकिन आज विशेष रूप से 37 सदस्यों (10 राज्यों की सीटों) की विदाई पर फोकस था, क्योंकि इन सीटों पर हाल ही में (16 मार्च 2026) चुनाव हुए थे। इनमें से 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले चुने गए।

रिटायरिंग में शामिल प्रमुख नाम: रामदास अठावले, प्रियंका चतुर्वेदी, तिरुची सिवा, अमरेंद्र धारी सिंह, अभिषेक मनु सिंघवी आदि।

विदाई के दौरान सदन में मीठे-कड़वे अनुभवों का जिक्र हुआ, लेकिन सभी ने एकजुट होकर सम्मान जताया।

यह समारोह संसद के बजट सत्र के बीच हुआ, जहां हंगामा भी चल रहा था, लेकिन विदाई के पल में सभी दलों ने एकजुटता दिखाई। पीएम का संदेश साफ था—सदन सिर्फ बहस का मंच नहीं, बल्कि सीखने और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी संस्था है। क्या आपको लगता है कि राजनीति में सच में कोई फुलस्टॉप नहीं होता? कमेंट में बताएं!

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