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पश्चिम एशिया संकट: अब तक 2.44 लाख भारतीयों की वतन वापसी, विदेश मंत्रालय ने जारी किए ताज़ा आंकड़े

पश्चिम एशिया संकट: अब तक 2.44 लाख भारतीयों की वतन वापसी, विदेश मंत्रालय ने जारी किए ताज़ा आंकड़े

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। पश्चिम एशिया में गहराते संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि सुरक्षा कारणों से अब तक लगभग 2.44 लाख भारतीय इस क्षेत्र से स्वदेश लौट चुके हैं।

प्रमुख बिंदु: एक नज़र में

* वापसी का आंकड़ा: 28 फरवरी से अब तक 2.44 लाख लोग भारत लौटे।

* हताहत: संघर्ष में अब तक 5 भारतीय नागरिकों की मौत, 1 लापता।

* सुरक्षित गलियारा: ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारतीय नागरिक निकाले जा रहे हैं।

अंर्त-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बड़ा खुलासा

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि सरकार युद्धग्रस्त और तनावपूर्ण इलाकों से भारतीयों को निकालने की प्रक्रिया में पूरी तरह जुटी हुई है। उन्होंने पुष्टि की कि इस संघर्ष की चपेट में आने से अब तक पांच भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है, जिसकी तलाश के लिए प्रयास जारी हैं।

ओमान से लाए गए पार्थिव शरीर

ब्रीफिंग के दौरान जानकारी दी गई कि ओमान के सोहार शहर में हुई एक दुखद घटना में दो भारतीयों की मौत हो गई थी। उनके पार्थिव शरीर मंगलवार को विशेष विमान से भारत लाए गए और राजस्थान के जयपुर में उनके शोकाकुल परिजनों को सौंप दिए गए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा और प्रभावित परिवारों की सहायता उनकी प्राथमिकता है।

ईरान से निकासी के लिए ‘बैकअप’ रूट का इस्तेमाल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने निकासी की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि ईरान में फंसे भारतीयों (विशेषकर छात्रों) को सीधे हवाई मार्ग के बजाय पड़ोसी देशों के रास्ते निकाला जा रहा है।

“कल तक लगभग 650 भारतीय नागरिक ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे थे। अब लगभग 50 और भारतीय आर्मेनिया पहुंच चुके हैं, जबकि कुछ अन्य अजरबैजान की ओर बढ़ रहे हैं ताकि वहां से सुरक्षित स्वदेश लौट सकें— रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता (विदेश मंत्रालय)

आगे की स्थिति

खाड़ी देशों से इतनी बड़ी संख्या में लोगों की वापसी भारत के लिए एक बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती है। हालांकि, सरकार ने आश्वस्त किया है कि वे स्थिति पर पल-पल नजर बनाए हुए हैं और यदि तनाव और बढ़ता है, तो निकासी की गति को और तेज किया जाएगा।

 

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