केदारनाथ धाम: बाबा केदार की ‘रूप छड़’ को लेकर विवाद, सरकार ने दिए जांच के आदेश
केदारनाथ धाम: बाबा केदार की ‘रूप छड़’ को लेकर विवाद, सरकार ने दिए जांच के आदेश
देहरादून/केदारनाथ: केदारनाथ धाम में अत्यधिक धार्मिक महत्व रखने वाले धर्म दंड (रूप छड़) को मंदिर समिति के भंडार गृह से बाहर ले जाने का मामला गरमा गया है। इस लापरवाही और परंपराओं के उल्लंघन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है ‘रूप छड़’ का महत्व?
सनातन धर्म और देवभूमि की परंपराओं में केदारनाथ के धर्म दंड (रूप छड़) का विशेष स्थान है:
* साक्षात स्वरूप: पंडा-पुरोहितों और जानकारों के अनुसार, रूप छड़ का दर्शन करना साक्षात बाबा केदार के दर्शन के समान पुण्यकारी माना जाता है।
* अविभाज्य अंग: यह चल विग्रह डोली के साथ चलने वाला प्रतीक है, जिसे भगवान की निजी संपत्ति माना जाता है।
* नियम: कपाट बंद होने के बाद सभी धार्मिक प्रतीकों को बदरी केदार मंदिर समिति (BKTC) के खजाने में सुरक्षित रखने का प्रावधान है। इन्हें धाम या निर्धारित स्थान से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
हाल ही में जब भंडार गृह की जांच की गई, तो चांदी का यह बेशकीमती धर्म दंड वहां मौजूद नहीं था। जांच में सामने आया कि:
* निजी कार्यक्रम: केदारनाथ के मुख्य रावल भीमाशंकर लिंग महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक निजी ‘पट्टा अभिषेक रजत महोत्सव’ में गए थे।
* अनुमति का सवाल: BKTC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विजय थपलियाल ने 19 जनवरी 2026 को इस धर्म दंड को बाहर ले जाने की अनुमति दी थी।
* परंपरा का उल्लंघन: साल 2000 में भी तत्कालीन रावल ने ऐसी अनुमति मांगी थी, जिसे तब के प्रशासन ने यह कहकर रद्द कर दिया था कि ऐसी कोई परंपरा या दस्तूर नहीं है।
प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक प्रहार
सतपाल महाराज (धर्मस्य मंत्री): “धर्म दंड बेहद महत्वपूर्ण है, इसे इस तरह गायब या बाहर नहीं होना चाहिए। यह BKTC की जिम्मेदारी है कि वह प्रतीकों को सुरक्षित रखे। इस मामले की पूरी पड़ताल की जा रही है।”
प्रवीन तिवारी (पुरोहित, केदारनाथ): “जानकारी मिली है कि धर्म दंड महाराष्ट्र ले जाया गया था। हालांकि अब वह वापस आ गया है और सुरक्षित है, लेकिन बिना अनुमति या परंपरा के विरुद्ध ऐसा कदम उठाना गलत है।”
गरिमा दसौनी (कांग्रेस प्रवक्ता): “यह बड़ा सवाल है कि BKTC के अधिकारियों ने निजी कार्यक्रम के लिए यह अनुमति क्यों दी? अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की चुप्पी बताती है कि समिति में सब ठीक नहीं है।”
BKTC की चुप्पी पर सवाल
मामला तूल पकड़ने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और CEO ने मीडिया से दूरी बना ली है। धार्मिक प्रतीकों के साथ हुई इस छेड़छाड़ ने मंदिर समिति की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
