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ईरान से बढ़ते तनाव में ट्रंप का बड़ा ऐक्शन: अमेरिका मिडिल ईस्ट में तैनात करेगा दूसरा घातक नौसैनिक बेड़ा, USS थियोडोर रूजवेल्ट को भेजने की तैयारी

ईरान से बढ़ते तनाव में ट्रंप का बड़ा ऐक्शन: अमेरिका मिडिल ईस्ट में तैनात करेगा दूसरा घातक नौसैनिक बेड़ा, USS थियोडोर रूजवेल्ट को भेजने की तैयारी

वॉशिंगटन: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी पारी में ईरान से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने मिडिल ईस्ट में अपना दूसरा घातक नौसैनिक बेड़ा (Aircraft Carrier Strike Group) भेजने का फैसला किया है। यह घोषणा शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को व्हाइट हाउस से की गई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि “ईरान की आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी सेनाएं क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।”

ट्रंप का बयान और वजहें:

ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान पर निशाना साधते हुए कहा, “ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं और क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने वाले कदमों के खिलाफ हम मजबूती से खड़े हैं। हमारा दूसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वहां जाएगा, जहां पहले से ही USS अब्राहम लिंकन तैनात है। यह अमेरिका की ताकत का संदेश है।” यह फैसला हाल के दिनों में ईरान के मिसाइल परीक्षणों, हूती विद्रोहियों के समर्थन और इजरायल-हमास संघर्ष के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर लिया गया है।

दूसरा बेड़ा क्या है?

अमेरिकी नौसेना का USS थियोडोर रूजवेल्ट (CVN-71) कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है।

इस ग्रुप में शामिल हैं: विमान वाहक पोत, क्रूजर, डिस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां और 80 से ज्यादा लड़ाकू विमान (जैसे F-35, F/A-18)।

पहले से तैनात USS अब्राहम लिंकन के साथ मिलकर यह अमेरिका की क्षेत्रीय मौजूदगी को दोगुना कर देगा।

पेंटागन के अनुसार, यह बेड़ा फारस की खाड़ी और लाल सागर में गश्त बढ़ाएगा, जहां हूती हमलों से जहाजों को खतरा

ईरान का रिएक्शन:

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे “उकसावे की कार्रवाई” बताया है। तेहरान ने कहा, “अमेरिका की सैन्य तैनाती क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। हम अपनी रक्षा करेंगे।” ईरान ने हाल ही में अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने की धमकी दी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

ट्रंप की रणनीति:

ट्रंप ने 2024 चुनाव जीतने के बाद ईरान पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “हम ईरान को काबू में रखेंगे, जैसे हमने ISIS को खत्म किया।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम इजरायल को समर्थन और क्षेत्रीय सहयोगियों (सऊदी अरब, UAE) को आश्वासन देने का हिस्सा है।

यह घटनाक्रम मिडिल ईस्ट में नए संघर्ष की आशंका पैदा कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

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