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40 किलो सोना, एक पुराना थिएटर, सिर्फ चार किरदार… ‘तुम्बाड़’ डायरेक्टर की ‘मायासभा’ करेगी फिर कमाल?

40 किलो सोना, एक पुराना थिएटर, सिर्फ चार किरदार… ‘तुम्बाड़’ डायरेक्टर की ‘मायासभा’ करेगी फिर कमाल? 

‘तुम्बाड़’ (2018) ने जो जादू दिखाया था – लालच, पौराणिक भय, और मायावी दुनिया का – वो अब राही अनिल बर्वे की नई फिल्म मायासभा – द हॉल ऑफ इल्यूजन में वापस आ रहा है! ये साइकोलॉजिकल थ्रिलर 30 जनवरी 2026 को थिएटर्स में रिलीज हो रही है, और ट्रेलर देखकर लग रहा है कि ये ‘तुम्बाड़’ जैसा ही या उससे भी ज्यादा इंटेंस हो सकता है।

कहानी का केंद्रीय रहस्य क्या है?

एक पुराना, बंद पड़ा मुंबई का थिएटर – नाम मायासभा (भ्रम का महल)।

यहां एक वॉश्ड-अप, आधा पागल फिल्म प्रोड्यूसर (जावेद जाफरी) अपने बेटे के साथ रहता है।

लोककथाओं के अनुसार, दशकों पहले इस थिएटर में 40 किलो 24-कैरेट अनडॉक्यूमेंटेड सोने की बिस्किट्स छुपाई गई थीं – और वो आज भी यहीं कहीं हैं, लेकिन जगह भूल गई गई!

दो इंट्रूडर्स (घुसपैठिए) आते हैं, और रात भर चार किरदारों के बीच लालच, धोखा, पुराने राज़ और भ्रम की जंग शुरू हो जाती है।

ट्रेलर में जावेद जाफरी का डरावना, इंटेंस अवतार – “पानी-पानी किधर है?” जैसी लाइन्स, धुंध, सन्नाटा और सोने की तलाश – सब कुछ ‘तुम्बाड़’ की याद दिलाता है, लेकिन इस बार सेटिंग एक थिएटर है, जहां रियलिटी और इल्यूजन की लाइन धुंधली हो जाती है।

कास्ट और क्रेडिट्स

जावेद जाफरी – मुख्य किरदार, करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस (उनका खुद का कहना है)।

मोहम्मद समद, वीणा जमकर, दीपक दामले – बाकी तीन महत्वपूर्ण रोल्स।

डायरेक्टर/राइटर: राही अनिल बर्वे (तुम्बाड़ के क्रिएटर)।

प्रोडक्शन: गिरिश पटेल, अंकूर जे सिंह; प्रेजेंटेड बाय पिकल एंटरटेनमेंट, UFO Moviez।

रनटाइम: लगभग 1 घंटा 39 मिनट – छोटी लेकिन इंटेंस।

क्यों हो रही है इतनी बात?

‘तुम्बाड़’ को पहले रिलीज में सपोर्ट नहीं मिला, लेकिन बाद में कल्ट क्लासिक बन गया। फैंस कह रहे हैं – “तुम्बाड़ को हम फेल कर चुके, इस बार मायासभा को नहीं!”

फिल्म बिना बड़े प्रमोशन, कम स्क्रीन्स पर रिलीज हो रही है – लेकिन ट्रेलर और फेस्टिवल स्क्रीनिंग्स (एशियन फिल्म फेस्टिवल) में धमाल मचा चुकी है।

IMDb पर रेटिंग पहले से 8.9+ (फेस्टिवल रिव्यूज से), और लोग इसे “2026 की सबसे उम्मीद वाली इंडी थ्रिलर” बता रहे हैं।

थीम: लालच की कीमत, भ्रम vs हकीकत, और इंसानी रिश्तों का टूटना – ‘तुम्बाड़’ की तरह गहरा और डार्क।

अगर आप ‘तुम्बाड़’ के फैन हैं, तो ये फिल्म मिस नहीं करनी चाहिए! 30 जनवरी को थिएटर्स में जाकर देखें – शायद ये फिर एक कल्ट हिट बने। अलीगढ़ में नजदीकी थिएटर चेक कर लें, क्योंकि कम स्क्रीन्स हैं – जल्दी टिकट बुक कर लो!

ट्रेलर देखा? क्या लगता है – ‘तुम्बाड़’ से बेहतर होगी? कमेंट में बताएं!

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