Thursday, June 25, 2026
उत्तराखंड

251 किलो शुद्ध देसी घी से ढका जागेश्वर ज्योतिर्लिंग! मकर संक्रांति पर घृत कमल गुफा में विराजमान हुए भगवान शिव, फाल्गुन तक चलेगी गुप्त साधना

251 किलो शुद्ध देसी घी से ढका जागेश्वर ज्योतिर्लिंग! मकर संक्रांति पर घृत कमल गुफा में विराजमान हुए भगवान शिव, फाल्गुन तक चलेगी गुप्त साधना

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक अनुपम धार्मिक परंपरा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग को 251 किलोग्राम शुद्ध पहाड़ी गाय के देसी घी से ढककर घृत कमल की गुफा में विराजमान किया गया। यह परंपरा माघ माह के प्रथम दिन (मकर संक्रांति) से शुरू होकर फाल्गुन माह के प्रथम दिन तक चलती है, जिसमें भगवान शिव गुप्त साधना में लीन रहते हैं।

मंदिर परिसर में सुबह से ही वैदिक मंत्रोच्चारण और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ शिवलिंग पर घी का अभिषेक किया गया। मुख्य पुजारी हेमंत भट्ट और महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने बताया कि घी को पहले बड़े बर्तनों में खौलाया गया, फिर जटागंगा के ठंडे जल से शुद्ध किया। शुद्धिकरण के बाद घी जम गया और इसी घी से कमल की आकृति बनाई गई। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ ज्योतिर्लिंग को घृत कमल के भीतर स्थापित किया गया।

परंपरा की विशेषता और महत्व

घृत कमल गुफा: 251 किलो घी से तैयार की गई यह गुफा भगवान शिव को एक माह तक गुप्त साधना के लिए समर्पित रहती है।

घी का प्रसाद: फाल्गुन माह के प्रथम दिन गुफा खोली जाएगी और घी को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।

धार्मिक मान्यता: भक्तों का विश्वास है कि इस घी का सेवन चर्म रोग, माइग्रेन, पुराने सिरदर्द, सर्दी-जुकाम और नाक से रक्तस्राव जैसी बीमारियों को दूर करता है।

पौराणिक आधार: समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को पीने से भगवान शिव के शरीर में उत्पन्न ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने घी अर्पित किया था। तभी से घी अर्पण की यह परंपरा चली आ रही है।

मंदिर परिसर में उत्साह

मकर संक्रांति के दिन सुबह से ही हजारों श्रद्धालु जागेश्वर धाम पहुंचे। हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। मंदिर प्रबंधन समिति, स्थानीय ग्रामीणों, पुजारियों और श्रद्धालुओं के सहयोग से 251 किलो घी की व्यवस्था की गई। ठंड के बावजूद भक्तों की भारी भीड़ और भक्ति का माहौल देखते ही बन रहा था।

जागेश्वर धाम उत्तराखंड के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और यहां प्राचीन मंदिरों का समूह है। यह स्थान शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, खासकर मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर।

संक्षेप में, जागेश्वर धाम में 251 किलो घी से बनी घृत कमल गुफा ने भगवान शिव की गुप्त साधना शुरू कर दी। यह परंपरा न केवल धार्मिक है, बल्कि हजारों भक्तों के लिए आस्था और स्वास्थ्य का प्रतीक भी है।

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