Wednesday, June 24, 2026
राजनीति

मोदी कैबिनेट में जल्द फेरबदल की अटकलें खारिज, मॉनसून सत्र के बाद मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना

मोदी कैबिनेट में जल्द फेरबदल की अटकलें खारिज, मॉनसून सत्र के बाद मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना

​नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार (मोदी 3.0) के दो साल पूरे होने और हाल के कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद केंद्रीय मंत्रिपरिषद में फेरबदल की अटकलें तेज थीं, जिन्हें बीजेपी सूत्रों ने फिलहाल खारिज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस समय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाला संसद का मॉनसून सत्र है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉनसून सत्र से ठीक पहले 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। हालांकि, मॉनसून सत्र के संपन्न होने के बाद मंत्रिपरिषद में फेरबदल और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

​इन राजनीतिक घटनाक्रमों से बनी मंत्रिपरिषद विस्तार की संभावना

​पश्चिम बंगाल (TMC में टूट): राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 लोकसभा सांसद टूटकर अलग हो गए हैं और उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन दे दिया है। इसके साथ ही यह धड़ा एनडीए में बीजेपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा घटक दल बन चुका है। चूंकि इनसे कम संख्या बल वाले टीडीपी और जेडीयू के पास एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद है, इसलिए इस धड़े का भी एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद पर दावा बन सकता है। हालांकि, जनधारणा और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बीजेपी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। यही वजह है कि इस धड़े का बीजेपी में विलय न कराकर एक गुमनाम दल ‘एनसीपीआई’ में विलय कराया गया है।

​महाराष्ट्र (शिवसेना UBT में सेंध): महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल होने की खबर है, और यह संख्या सात तक पहुंच सकती है। इसके बाद शिंदे गुट की ताकत बढ़कर 13-14 सांसदों की हो जाएगी, जिससे उनका भी एक कैबिनेट मंत्री पद पर दावा मजबूत होगा। फिलहाल उनके पास केवल एक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का पद है।

​पंजाब (AAP सांसदों का आना): आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पंजाब यात्रा के दौरान राघव चड्ढा की खातिरदारी से इन अटकलों को और बल मिला है।

​मंत्रियों के कार्यकाल और सांगठनिक बदलावों का गणित

​जॉर्ज कूरियन का इस्तीफा: मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और मोदी मंत्रिपरिषद के इकलौते ईसाई मंत्री जॉर्ज कूरियन का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था। पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा न भेजने के फैसले के बाद कूरियन ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है।

​रवनीत सिंह बिट्टू: पंजाब से आने वाले राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो चुका है, लेकिन वे अभी मंत्री बने हुए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ा सकती है।

​हरदीप पुरी और बीएल वर्मा: उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बी एल वर्मा का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। चूंकि यूपी में अगले साल फरवरी में चुनाव हैं, इसलिए उनके बने रहने का फैसला पार्टी की चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।

​एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत: राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यूपी और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। नियम के मुताबिक दोनों इस्तीफा दे सकते हैं, हालांकि कुर्मी समाज को साधने के लिए पंकज चौधरी को चुनाव तक मंत्री बनाए रखा जा सकता है।

​आगामी 7 राज्यों के विधानसभा चुनाव और जातीय समीकरण तय करेंगे रूपरेखा

​सूत्रों के अनुसार, आगामी मंत्रिपरिषद विस्तार में अगले साल होने वाले सात राज्यों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

​उत्तर प्रदेश का समीकरण: यूपी में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पहले से है, लेकिन प्रदर्शन के आधार पर फेरबदल संभव है। वर्तमान में यूपी से कोई ब्राह्मण कैबिनेट मंत्री नहीं है, इसलिए ब्राह्मण चेहरों के साथ-साथ दलित और अति पिछड़े वर्ग की नुमाइंदगी बढ़ाई जा सकती है।

​संगठन और कैबिनेट में अदला-बदली: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का गठन भी होना है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि संगठन के कुछ कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

​कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की भी चर्चा

​मंत्रिपरिषद के साथ-साथ अगले महीने कई राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है:

​थावरचंद गहलोत (राज्यपाल, कर्नाटक) – जुलाई में कार्यकाल समाप्त।

​मंगूभाई पटेल (राज्यपाल, मध्य प्रदेश) – जुलाई में कार्यकाल समाप्त।

​लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (राज्यपाल, उत्तराखंड) – जुलाई में कार्यकाल समाप्त।

​आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल, उत्तर प्रदेश) – कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है।

​इन खाली हो रहे पदों को देखते हुए देश के कई राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति को लेकर भी शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है।

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