Wednesday, June 24, 2026
राष्ट्रीय

भरत तिवारी मौत मामले में न्यायिक जांच के आदेश, पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज करेंगे जांच; परिजनों ने दिया आंदोलन का अल्टीमेटम

भरत तिवारी मौत मामले में न्यायिक जांच के आदेश, पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज करेंगे जांच; परिजनों ने दिया आंदोलन का अल्टीमेटम

​भोजपुर: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने के लिए पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन कर दिया है। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा हुआ है। इस संबंध में भरत की मां की शिकायत पर शाहपुर थाने में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की जा चुकी है।

​पीड़ित परिवार ने अपना संकल्प स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्हें सरकार से कोई आर्थिक मुआवजा या सरकारी नौकरी नहीं चाहिए, बल्कि वे सिर्फ अपने बेटे की मौत के दोषियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा चाहते हैं और वे किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।

​पुलिस की दोहरी कार्रवाई से भड़का आक्रोश, परिजनों पर ही दर्ज हुआ मुकदमा

​यह मामला उस समय और अधिक पेचीदा हो गया जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मृतक के पिता, भाई और अन्य परिजनों समेत करीब 50 स्थानीय लोगों के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया। पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई ने इलाके के ग्रामीणों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

​प्रशासन के इसी रवैये के विरोध में बुधवार को बिलोटी गांव में एक विशाल महापंचायत बुलाई गई। इस महापंचायत में हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन को एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया है। भरत के भाई चंदन तिवारी ने साफ चेतावनी देते हुए कहा, “यदि एक सप्ताह के भीतर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो हम इस लड़ाई को दिल्ली तक ले जाएंगे और पूरे बिहार में एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेंगे।”

​जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की जांच पर टिकीं नजरें

​न्यायिक जांच टीम के गठन के बाद अब सबकी नजरें जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में होने वाली इस तफ्तीश पर टिक गई हैं। स्थानीय जनता और पीड़ित परिजनों का मानना है कि इस कदम से उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। अब देखना यह होगा कि क्या यह जांच टीम तय समय सीमा के भीतर सच को सामने ला पाती है या फिर भरत तिवारी के परिवार को इंसाफ के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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