Wednesday, June 24, 2026
राजनीति

बंगाल विधानसभा में ‘असली TMC’ की पहली परीक्षा, PAC अध्यक्ष पद को लेकर ममता और ऋतब्रत गुट में आर-पार की जंग

बंगाल विधानसभा में ‘असली TMC’ की पहली परीक्षा, PAC अध्यक्ष पद को लेकर ममता और ऋतब्रत गुट में आर-पार की जंग

​कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी वर्चस्व की लड़ाई अब राज्य विधानसभा के भीतर एक नए और बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान अब ‘लोक लेखा समिति’ (PAC) के अध्यक्ष पद के चुनाव में पहली औपचारिक शक्ति परीक्षा (फ्लोर टेस्ट) का रूप लेने जा रही है।

​विधानसभा सचिवालय ने जारी की अधिसूचना, 5 जुलाई को हो सकता है मतदान

​पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने मंगलवार को पीएसी (PAC) समेत सदन की चार सबसे महत्वपूर्ण समितियों के गठन के लिए चुनाव प्रक्रिया की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।

​इन समितियों का होगा गठन: लोक लेखा समिति (PAC), सार्वजनिक उपक्रम समिति, प्राक्कलन समिति और स्थानीय निधि लेखा समिति।

​चुनाव कार्यक्रम:

​30 जून: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि।

​1 जुलाई: नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी)।

​2 जुलाई: नाम वापस लेने की आखिरी तारीख।

​5 जुलाई: आवश्यकता पड़ने पर (सीटों से अधिक नामांकन होने की स्थिति में) मतदान।

​विधानसभा सूत्रों के अनुसार, इन समितियों के गठन की प्रक्रिया में विपक्षी खेमे के सभी विधायक (दोनों टीएमसी गुट, कांग्रेस, सीपीआई (M) और आईएसएफ) हिस्सा लेंगे।

​क्यों बेहद खास है लोक लेखा समिति (PAC)?

​लोक लेखा समिति (PAC) को विधानसभा की सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली समितियों में से एक माना जाता है, जिसका मुख्य कार्य सरकारी खर्चों की बारीकी से निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग तय नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं। इस समिति में अध्यक्ष सहित अधिकतम 20 सदस्य होते हैं। लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार, पीएसी का अध्यक्ष पद हमेशा विपक्ष के किसी सदस्य को दिया जाता है। लेकिन इस बार टीएमसी के भीतर हुए विभाजन ने इस पूरी व्यवस्था और इसके समीकरणों को बेहद जटिल बना दिया है।

​फिरहाद हकीम के नाम पर दांव खेलने की तैयारी में ऋतब्रत गुट

​सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी का गुट, जो टीएमसी के कुल 80 में से करीब 65 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है, पीएसी अध्यक्ष पद पर हर हाल में कब्जा जमाने की रणनीति बना रहा है। बागी गुट इस रसूखदार पद के लिए कोलकाता के पूर्व मेयर और वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के नाम पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

​चूंकि दोनों ही गुट समिति की सदस्यता के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों की फौज उतारने की तैयारी में हैं, इसलिए उपलब्ध 20 सीटों से अधिक नामांकन होना तय माना जा रहा है। ऐसे में 5 जुलाई को होने वाला यह गुप्त मतदान विधानसभा के भीतर दोनों धड़ों के बीच सीधा मुकाबला बन जाएगा।

​ममता बनर्जी को हटाकर अरूप रॉय को चुना ‘असली TMC’ का अध्यक्ष

​तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह संकट उस समय चरम पर पहुंच गया जब पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधायकों का भारी समर्थन मिला और उन्होंने पार्टी आलाकमान द्वारा प्रस्तावित शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम को खारिज करते हुए खुद को नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया। यह कानूनी विवाद फिलहाल अदालत में लंबित है।

​इस बीच, सोमवार को कोलकाता में एक विशेष बैठक बुलाकर ऋतब्रत गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का एकतरफा एलान कर दिया और वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को ‘असली टीएमसी’ का नया अध्यक्ष चुन लिया। इसके साथ ही उन्होंने समानांतर संगठनात्मक ढांचा भी खड़ा कर दिया है, जिससे टकराव और ज्यादा बढ़ गया है।

​संसद से लेकर चुनाव आयोग और अदालत तक कानूनी जंग

​दोनों गुटों के बीच सिर्फ सड़क और सदन ही नहीं, बल्कि कानूनी मोर्चों पर भी आर-पार की लड़ाई चल रही है:

​संसद में बड़ा झटका: टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद पहले ही ममता बनर्जी का साथ छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो चुके हैं और केंद्र में एनडीए सरकार को समर्थन दे रहे हैं। राज्यसभा में भी सुखेंदु शेखर रॉय जैसे कद्दावर चेहरे पार्टी से किनारा कर चुके हैं।

​चुनाव आयोग में दावेदारी: ममता बनर्जी खेमे का कहना है कि उन्होंने आयोग को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची सौंप दी है, जबकि बागी गुट भी खुद को असली टीएमसी बताते हुए चुनाव आयोग और अदालतों में अपना दावा ठोक चुका है।

​राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 5 जुलाई को होने वाला यह संभावित मतदान महज एक समिति के गठन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश के सामने साफ कर देगा कि बंगाल विधानसभा के भीतर वास्तव में किस गुट का पलड़ा भारी है और ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ पर किसका हक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *