UPI यूजर्स के लिए खुशखबरी: NPCI ला रहा है ‘यूनिफाइड ऑटोपे ट्रैकिंग’ फीचर, एक ही ऐप में दिखेंगे सभी ऑटोमैटिक पेमेंट्स
UPI यूजर्स के लिए खुशखबरी: NPCI ला रहा है ‘यूनिफाइड ऑटोपे ट्रैकिंग’ फीचर, एक ही ऐप में दिखेंगे सभी ऑटोमैटिक पेमेंट्स
यदि आप भी नेटफ्लिक्स, डिज्नी+ हॉटस्टार जैसे OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल रिचार्ज या बिजली-पानी के बिलों के लिए अलग-अलग UPI ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) के जरिए ऑटोमैटिक पेमेंट (AutoPay) का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक नया और बेहद सुविधाजनक फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। इस नए सिस्टम के आने के बाद यूजर्स को अपने सभी ऑटो-पेमेंट्स (e-mandates) को देखने और मैनेज करने के लिए अलग-अलग ऐप्स पर भटकना नहीं पड़ेगा।
तैयार हो रहा है एक कॉमन इंटरफेस
इकोनॉमिक टाइम्स (ET Telecom) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, NPCI एक ऐसा सॉफ्टवेयर या एप्लीकेशन इंटरफेस (API) विकसित कर रहा है, जिसे सभी UPI ऐप्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
वर्तमान में यदि आपने कोई ऑटोमैटिक पेमेंट Google Pay से सेट किया है और दूसरा Paytm या PhonePe से, तो उनकी सूची देखने के लिए आपको उन अलग-अलग ऐप्स को खोलना पड़ता है। लेकिन इस नए फीचर की मदद से आप किसी भी एक UPI ऐप को खोलकर अपने सभी एक्टिव ऑटो-पेमेंट्स की पूरी लिस्ट एक ही जगह देख सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा कारणों से यदि आपको किसी ऑटो-पेमेंट में बदलाव करना होगा या उसे कैंसिल करना होगा, तो ऐप आपको उस ओरिजिनल ऐप पर रीडायरेक्ट कर देगा जिससे वह मैंडेट शुरू किया गया था।
क्यों पड़ी इस नए फीचर की जरूरत?
पिछले कुछ वर्षों में देश के भीतर ‘UPI AutoPay’ फीचर की लोकप्रियता में भारी उछाल आया है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार, केवल मई महीने में ही देश के टॉप 10 बैंकों ने करीब 1.6 बिलियन (160 करोड़) ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए हैं, जो पिछले साल के मई महीने (57.7 करोड़) के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा हैं।
रिजेक्शन और जुर्माने से मिलेगी राहत
ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ने के साथ-साथ एक बड़ी समस्या ऑटो-पेमेंट रिजेक्ट (फेल) होने की भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार:
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) के केवल 30 प्रतिशत ऑटो-पे ट्रांजैक्शन ही सफल हो पाते हैं।
इसका सीधा मतलब है कि 70 प्रतिशत ट्रांजैक्शन रिजेक्ट हो जाते हैं।
इन रिजेक्शन्स की मुख्य वजह समय पर बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस (मिनिमम बैलेंस) न होना है।
जब भी कोई ऑटो-डेबिट मैंडेट रिजेक्ट होता है, तो बैंकों द्वारा ग्राहकों पर पेनाल्टी (जुर्माना) लगाई जाती है। NPCI के इस नए यूनिफाइड डैशबोर्ड की मदद से यूजर्स अपने सभी आगामी पेमेंट्स पर नजर रख सकेंगे और समय रहते खाते में बैलेंस मेंटेन करके इस जुर्माने से बच सकेंगे।
हेल्प पोर्टल से भी मिल रही है मदद
आपको बता दें कि NPCI ने पिछले साल एक चैटबॉट आधारित ‘UPI हेल्प’ पोर्टल (https://www.upihelp.npci.org.in/) भी लाइव किया था, जहां जाकर यूजर्स ई-मैंडेट से जुड़े अपने सवाल पूछ सकते हैं और सक्रिय शिकायतों का निवारण पा सकते हैं। अब सीधे UPI ऐप्स के भीतर ही इस कंबाइंड लिस्टिंग फीचर के जुड़ जाने से देश के करोड़ों डिजिटल पेमेंट करने वाले यूजर्स का अनुभव और भी बेहतर और सुरक्षित हो जाएगा।
