‘भोजपुरी सिनेमा हॉलीवुड से बेहतर है’; अक्षय कुमार ने इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा, फ्लॉप फिल्मों और कॉमेडी पर भी की खुलकर बात
‘भोजपुरी सिनेमा हॉलीवुड से बेहतर है’; अक्षय कुमार ने इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा, फ्लॉप फिल्मों और कॉमेडी पर भी की खुलकर बात
नई दिल्ली: बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आगामी मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में अभिनेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस (IANS) को एक विशेष इंटरव्यू दिया। इस बातचीत के दौरान उन्होंने अपने तीन दशक लंबे फिल्मी करियर, बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों की असफलता, बदलते सिनेमा और कॉमेडी के जॉनर (विधा) पर बेहद बेबाकी से अपने विचार साझा किए।
जैकलीन का वो डायलॉग मैंने ही लिखवाया था: अक्षय कुमार
इंटरव्यू के दौरान अक्षय कुमार ने भोजपुरी सिनेमा के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए एक बेहद दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया, “भोजपुरी सिनेमा बहुत खास है। अगर आपने फिल्म का भोजपुरी ट्रैक ‘घिस घिस’ देखा हो, तो उसमें जैकलीन फर्नांडिस का एक डायलॉग है— ‘भोजपुरी हॉलीवुड से बेहतर है।’ वह डायलॉग असल में मैंने ही फिल्म में शामिल करवाया था, आप चाहें तो निर्देशक से भी पूछ सकते हैं। पर्दे पर भोजपुरी अभिनेता का किरदार निभाना मेरे लिए हमेशा सम्मान की बात रही है।”
’खेल खेल में’ बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली, पर आगे लोग इसे याद करेंगे
अक्षय कुमार ने पिछले साल रिलीज हुई अपनी फिल्म ‘खेल खेल में’ के बॉक्स ऑफिस पर न चलने को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हर फिल्म का अपना एक सही समय होता है। आज ही यहां आने से करीब ढाई घंटे पहले मैं अपने दोस्तों, बहन और भांजी के साथ बैठकर ‘खेल खेल में’ ही देख रहा था। आप मेरी बात से सहमत हों या न हों, लेकिन मुझे लगता है कि यह एक बहुत अच्छी फिल्म है। मैं जानता हूं कि यह बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं कि आने वाले समय में लोग इसे याद करेंगे और कहेंगे कि यह एक शानदार फिल्म थी।”
’खट्टा मीठा’ का दिया उदाहरण
अपनी बात को साबित करने के लिए अक्षय ने अपनी पुरानी फिल्म ‘खट्टा मीठा’ (2010) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रिलीज के समय ‘खट्टा मीठा’ भी बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी, लेकिन आज सोशल मीडिया और मीम्स की दुनिया में उस फिल्म की एक अलग ही पहचान है। मुझे पूरी उम्मीद है कि ‘खेल खेल में’ के साथ भी भविष्य में ऐसा ही होगा।
फिल्म के विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह एक डार्क ह्यूमर वाली फिल्म है, जो गंभीर विषय के बावजूद लोगों को खूब हंसाती है। इसमें जब किरदारों के मोबाइल फोन एक साथ टेबल पर रखे जाते हैं और कोई भी उन्हें चेक कर सकता है, तो उनकी शादियां और जिंदगियां उलझ जाती हैं। तलाक जैसी नौबत आ जाती है, लेकिन दर्शक फिर भी इस सिचुएशन पर हंस रहे होते हैं।”
”10 साल तक मुझे किसी ने कॉमेडी रोल ऑफर ही नहीं किया”
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए अक्षय कुमार ने बताया कि करियर के पहले 30 सालों में से शुरुआती 10 साल उन्होंने सिर्फ और सिर्फ एक्शन फिल्में की थीं, क्योंकि किसी भी डायरेक्टर ने उन्हें कॉमेडी रोल ऑफर ही नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे कॉमेडी की तरफ कदम बढ़ाया।
कॉमेडी के बदलते स्वरूप पर अक्षय ने कहा, “आज कॉमेडी के कई रूप हो गए हैं—डार्क ह्यूमर, फिजिकल कॉमेडी और सिचुएशनल कॉमेडी। अब बहुत कुछ बदल चुका है। कॉमेडी एक विशाल समुद्र की तरह है, आप इसे जितना भी सीखें, ऐसा लगता है कि आप अभी सिर्फ सतह पर ही हैं। मैं उन कलाकारों की दिल से सराहना करता हूं, जिनमें पूरे स्टेडियम या थिएटर में बैठे हजारों लोगों को एक साथ हंसाने का हुनर होता है।”
