उत्तराखंड

हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध? धामी सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में, गंगा सभा और साधु-संतों की मांग पर गंभीर विचार

हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध? धामी सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में, गंगा सभा और साधु-संतों की मांग पर गंभीर विचार

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार हरिद्वार को लेकर एक ऐतिहासिक और संवेदनशील फैसला लेने की कगार पर है। 2027 में होने वाले महाकुंभ से पहले गंगा सभा, साधु-संतों और विभिन्न हिंदू संगठनों ने मांग की है कि हरिद्वार के 100 से अधिक गंगा घाटों (खासकर हर की पौड़ी और आसपास) में गैर-हिंदुओं का आना-जाना पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। मुख्यमंत्री धामी ने इशारों-इशारों में साफ संकेत दिए हैं कि सरकार इस मांग को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकती है।

मंगलवार की घटना ने मचा दिया हड़कंप

मंगलवार को हर की पौड़ी पर दो युवक (नवीन कुमार और प्रिंस, दोनों 22 वर्षीय, सिडकुल निवासी) शेख की वेशभूषा में पहुंचे और वीडियो बनाकर लाइक्स-फॉलोअर्स बढ़ाने की कोशिश की। हरिद्वार प्रशासन और गंगा सभा में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि दोनों यूट्यूबर हैं और सिर्फ वायरल होने के चक्कर में ऐसा किया। इस घटना ने पुरानी मांग को फिर से जोर दिया—कि हरिद्वार की धार्मिक गरिमा को बचाने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।

गंगा सभा और साधु-संतों की मांग

गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर मांग की कि 1916 के हरिद्वार नगर निगम बायलॉज (Byelaws) को सख्ती से लागू किया जाए। इन बायलॉज के अनुसार:

हर की पौड़ी और आसपास के धार्मिक क्षेत्रों में गैर-हिंदू जमीन नहीं खरीद सकते।

सूर्यास्त के बाद गैर-हिंदू दुकानदारों/व्यापारियों को क्षेत्र छोड़ना होता है।

गैर-हिंदू अधिकारियों की ड्यूटी भी सूर्यास्त के बाद नहीं लगाई जा सकती—अगर लगाई जाए तो उन्हें क्षेत्र छोड़ना पड़ता है।

नितिन गौतम ने कहा, “हम 1916 एक्ट के तहत ही सरकार से काम करने की मांग कर रहे हैं। मंगलवार की घटना के बाद यह और जरूरी हो गया है कि सरकार जल्द फैसला ले, ताकि भविष्य में ऐसी कोई हरकत न हो सके।”

सीएम धामी का संकेत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “चारधाम हो या हरिद्वार का गंगा घाट या अन्य धार्मिक स्थल—सभी का एक एक्ट है। उस एक्ट के तहत जो बेहतर होगा, सरकार वही करेगी। गंगा सभा, साधु-संत और अन्य स्टेकहोल्डर हैं। उनकी मांग को गंभीरता से लिया जाएगा और आगे कदम बढ़ाए जाएंगे।” धामी की यह टिप्पणी हिंदूवादी छवि मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है, खासकर 2027 कुंभ और आने वाले चुनावों को देखते हुए।

क्या होगा फैसला?

अगर सरकार मांग मानती है, तो हर की पौड़ी और प्रमुख घाटों में गैर-हिंदुओं के लिए सख्त प्रतिबंध लग सकते हैं—शाम 6 बजे के बाद एंट्री बंद, सख्त चेकिंग, और बायलॉज का पूर्ण पालन।

विपक्ष (कांग्रेस) ने इसे “संविधान विरोधी” और “भेदभावपूर्ण” बताया है, जबकि BJP समर्थक इसे “हरिद्वार की आस्था की रक्षा” बता रहे हैं।

2027 कुंभ से पहले यह फैसला राजनीतिक तौर पर बहुत अहम माना जा रहा है।

संक्षेप में, मंगलवार की घटना के बाद हरिद्वार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध की मांग तेज हो गई है। धामी सरकार अब गंभीर विचार में है—क्या 1916 बायलॉज को फिर से सख्ती से लागू किया जाएगा? आने वाले दिनों में बड़ा फैसला संभव!

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