उत्तराखंड

मकर संक्रांति पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्त्यमुनि में हंगामा: अगस्त्य मुनि महाराज की डोली ने मैदान में प्रवेश नहीं किया, भक्तों ने तोड़ा गेट—15 साल बाद निकली ऐतिहासिक डोली यात्रा में विवाद

मकर संक्रांति पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्त्यमुनि में हंगामा: अगस्त्य मुनि महाराज की डोली ने मैदान में प्रवेश नहीं किया, भक्तों ने तोड़ा गेट—15 साल बाद निकली ऐतिहासिक डोली यात्रा में विवाद

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ हाईवे पर स्थित अगस्त्यमुनि में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर भारी विवाद और हंगामा देखने को मिला। अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक डोली यात्रा 15 साल बाद निकली थी, लेकिन मैदान के मुख्य गेट (गोल गेट) न तोड़े जाने के कारण डोली ने दो दिन से प्रवेश नहीं किया। इससे गुस्साए भक्तों और स्थानीय लोगों ने खुद गेट तोड़ने की कोशिश शुरू कर दी—महिलाएं भी गेट पर चढ़कर हथौड़े से तोड़ रही हैं। मौके पर सैकड़ों की भीड़ जमा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

डोली यात्रा का इतिहास: अगस्त्य मुनि महाराज की डोली हर साल मकर संक्रांति पर मंदिर से निकलकर अगस्त्य ऋषि के मैदान (अगस्त्यमुनि मैदान) में जाती है। यहां भक्त डोली का स्वागत करते हैं और पूजा-अर्चना होती है। यह परंपरा सदियों पुरानी है।

15 साल बाद निकली डोली: कोविड और अन्य कारणों से 15 साल बाद इस साल डोली यात्रा का आयोजन हुआ। डोली समिति ने प्रशासन को पहले ही सूचना दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मैदान पर विवाद: सरकार ने इस मैदान पर स्टेडियम निर्माण शुरू किया है, जिसका अगस्त्य मुनि मंदिर समिति और स्थानीय लोग लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह भूमि अगस्त्य ऋषि मंदिर की है और यहां धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। इसी वजह से मैदान में लंबे समय से धरना-प्रदर्शन चल रहा है।

गेट बंद होने का मुद्दा: मैदान का मुख्य गेट ऊपर से बंद है (शायद निर्माण या सुरक्षा कारणों से)। बुधवार को डोली पहुंची लेकिन प्रवेश नहीं मिला। गुरुवार (मकर संक्रांति) को फिर डोली आई, लेकिन गेट न तोड़े जाने पर प्रवेश नहीं हुआ।

भक्तों का गुस्सा: इससे भड़के भक्तों ने खुद गेट तोड़ने का प्रयास शुरू किया। वीडियो में महिलाएं गेट पर चढ़कर हथौड़े से तोड़ती दिख रही हैं। डोली समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासन का कहना है कि मैदान पर निर्माण कार्य चल रहा है और सुरक्षा कारणों से गेट बंद रखा गया है। लेकिन डोली समिति और भक्तों का आरोप है कि प्रशासन ने जानबूझकर कोई व्यवस्था नहीं की। पुलिस और SDM मौके पर पहुंचे हैं, लेकिन अभी तक कोई बड़ा एक्शन नहीं हुआ। स्थिति को काबू में करने के प्रयास जारी हैं।

सियासी और सामाजिक प्रभाव

यह घटना केदारनाथ हाईवे पर धार्मिक भावनाओं और विकास कार्यों के बीच टकराव को फिर उजागर कर रही है। भक्तों का कहना है कि धार्मिक स्थलों और परंपराओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। वहीं सरकार स्टेडियम को खेल और युवा विकास के लिए जरूरी बता रही है।

संक्षेप में, मकर संक्रांति के दिन अगस्त्य मुनि महाराज की डोली ने मैदान में तांडव मचाया—लेकिन यह तांडव भक्तों के गुस्से और गेट तोड़ने की कोशिश के रूप में था। 15 साल बाद निकली यात्रा विवाद में फंस गई। अब देखना है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और गेट खुलवाने या तोड़ने का फैसला क्या होता है!

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