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चमोली में रणनीतिक अहमियत: मलारी स्टील ब्रिज से भारत-चीन सीमा तक यातायात होगा सुगम, BRO की बड़ी उपलब्धि!

चमोली में रणनीतिक अहमियत: मलारी स्टील ब्रिज से भारत-चीन सीमा तक यातायात होगा सुगम, BRO की बड़ी उपलब्धि!

चमोली, 4 जनवरी 2026: उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-चीन सीमा से सटे दुर्गम इलाके में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने बड़ा काम पूरा किया है। जोशीमठ-मलारी हाईवे पर धाक गदेरे के ऊपर 93 मीटर लंबा स्टील गर्डर ब्रिज बनकर तैयार हो गया है, जो सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ेगा। यह पुल नीति घाटी और मलारी तक पहुंच को आसान बनाएगा, जहां से आगे भारत-तिब्बत (चीन) सीमा लगती है। इससे सेना, ITBP और स्थानीय लोगों की आवाजाही सुगम हो जाएगी।

पुल की खासियतें और महत्व:

लंबाई: 93 मीटर स्पैन वाला स्टील गर्डर ब्रिज।

स्थान: जोशीमठ से 13 किमी आगे धाक गदेरे पर।

पहले की स्थिति: पुराना सिंगल लेन ब्रिज जर्जर हो चुका था, जिससे आवाजाही मुश्किल थी।

फायदे:

सेना और ITBP की तैनाती आसान।

सीमावर्ती गांवों (नीति, मलारी आदि) का संपर्क मजबूत।

पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार के नए अवसर।

सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी।

BRO ने इस पुल को पुराने बैली ब्रिज की जगह बनाया है, जो रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। चमोली जिला चीन से सटी 100 किमी से ज्यादा सीमा साझा करता है। पहले लैंडस्लाइड और प्राकृतिक आपदाओं से यहां पुल और सड़कें बार-बार क्षतिग्रस्त होती रही हैं, लेकिन नया स्टील ब्रिज ज्यादा मजबूत और टिकाऊ है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, ऐसे कई प्रोजेक्ट्स LAC के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए चल रहे हैं। स्थानीय लोग खुश हैं कि अब दुर्गम इलाकों में आने-जाने की बड़ी समस्या दूर हो जाएगी। BRO की टीम को कठिन मौसम और ऊंचाई में काम करने के लिए सराहना मिल रही है।

यह पुल भारत की बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ताकत देगा। सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा के लिए यह मील का पत्थर साबित होगा!

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