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सऊदी अरब में शराब पर बैन की पूरी कहानी: 1952 में क्यों लगा प्रतिबंध, क्राउन प्रिंस ने अब किसे दी छूट

सऊदी अरब में शराब पर बैन की पूरी कहानी: 1952 में क्यों लगा प्रतिबंध, क्राउन प्रिंस ने अब किसे दी छूट

रियाद, 22 दिसंबर 2025: इस्लाम की पवित्र भूमि सऊदी अरब में शराब पर 73 साल से सख्त बैन है, लेकिन हाल के वर्षों में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में धीरे-धीरे नियमों में ढील दी जा रही है। यह बदलाव ‘विजन 2030’ का हिस्सा है, जिसका मकसद देश को पर्यटन, व्यापार और निवेश के लिए आकर्षक बनाना है। आइए जानते हैं कि शराब पर बैन कब और क्यों लगा, और अब क्या बदलाव हो रहा है।

शराब पर बैन कब और क्यों लगा?

सऊदी अरब की स्थापना 1932 में हुई, तब शराब की बिक्री और इस्तेमाल पर कोई आधिकारिक सरकारी बैन नहीं था। हालांकि, इस्लाम में शराब को हराम (निषिद्ध) माना जाता है, इसलिए सार्वजनिक रूप से इसका इस्तेमाल बहुत कम था।

1951 की घटना ने सब बदल दिया: संस्थापक राजा अब्दुलअजीज अल सऊद (इब्न सऊद) के बेटे प्रिंस मिशारी बिन अब्दुलअजीज नशे में धुत होकर एक पार्टी में पहुंचे। वहां ब्रिटिश उप-कौंसल सिरिल उस्मान ने उन्हें और शराब देने से इनकार कर दिया। गुस्से में प्रिंस मिशारी ने बंदूक से सिरिल की हत्या कर दी।

इस घटना से राजा बेहद शर्मिंदा हुए और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब हुई। नतीजा- 1952 में शराब की बिक्री और आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।

तब से सऊदी नागरिकों और आम लोगों के लिए शराब पूरी तरह बैन है। सजा में कोड़े मारना, जुर्माना, जेल या निर्वासन शामिल है।

क्राउन प्रिंस ने बदले नियम, अब किसे मिली छूट?

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के ‘विजन 2030’ सुधारों के तहत देश को आधुनिक बनाने की कोशिश हो रही है। शराब नीति में ये प्रमुख बदलाव:

2024 में पहला कदम: रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में देश का पहला शराब स्टोर खोला गया। यह केवल गैर-मुस्लिम राजनयिकों के लिए है। खरीदारी के लिए मोबाइल ऐप से रजिस्ट्रेशन और विदेश मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है। मकसद- डिप्लोमैटिक पाउच से होने वाली तस्करी और ब्लैक मार्केट को रोकना।

2025 में बड़ा बदलाव: अब इस स्टोर तक पहुंच बढ़ा दी गई है। गैर-मुस्लिम प्रीमियम रेजिडेंसी होल्डर्स (अमीर विदेशी निवासी, निवेशक, उद्यमी या विशेष स्किल वाले लोग) भी शराब खरीद सकते हैं। ये लोग बिना सऊदी स्पॉन्सर के रहते, काम करते और संपत्ति खरीद सकते हैं।

स्टोर में वाइन, बीयर और लिकर उपलब्ध हैं, लेकिन कीमतें ऊंची हैं। डिप्लोमैट्स को टैक्स छूट मिलती है, लेकिन प्रीमियम होल्डर्स को नहीं।

भविष्य में जेद्दा और धाहरण (अरामको कंपाउंड) में भी नए स्टोर खुलने की खबरें हैं। हालांकि, 2034 फीफा वर्ल्ड कप में भी पब्लिक सेल नहीं होगी।

क्यों हो रहा यह बदलाव?

ब्लैक मार्केट और घरेलू शराब बनाने की समस्या रोकना।

विदेशी निवेशकों, पर्यटकों और टैलेंट को आकर्षित करना।

अर्थव्यवस्था को तेल से हटाकर टूरिज्म और बिजनेस पर निर्भर बनाना।

लेकिन सऊदी नागरिकों और मुसलमानों के लिए अभी भी सख्त बैन है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह धीमा लेकिन ऐतिहासिक बदलाव है, जो सऊदी को ग्लोबल हब बनाने की दिशा में है। हालांकि, धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ये छूट बहुत सीमित हैं।

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