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अभिनेता धर्मेंद्र की शोकसभा में सितारों का सैलाब: अमित शाह ने कहा, “उनका सफर प्रेरणा है”, हेमा मालिनी इमोशनल

अभिनेता धर्मेंद्र की शोकसभा में सितारों का सैलाब: अमित शाह ने कहा, “उनका सफर प्रेरणा है”, हेमा मालिनी इमोशनल

नई दिल्ली: बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र की स्मृति में गुरुवार को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शोकसभा आयोजित की गई। पत्नी हेमा मालिनी और बेटियों ईशा व अहाना देवल ने आयोजन किया, जिसमें राजनीति और सिनेमा जगत के दिग्गजों ने पुष्पांजलि अर्पित की। यह दूसरी शोकसभा थी—पहली मुंबई में हुई थी—और इसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और अभिनेत्री कंगना रनौत जैसे नाम शामिल हुए। 89 वर्षीय धर्मेंद्र का 24 नवंबर को निधन हो गया था, जो उनके 90वें जन्मदिन से महज दो सप्ताह पहले था।

शोकसभा में अमित शाह ने भावुक भाषण दिया। उन्होंने कहा, “मैं यहां गृह मंत्री या हेमा जी के सहयोगी के नाते नहीं, बल्कि धर्मेंद्र जी की सादगी व देशभक्ति के प्रशंसक के रूप में आया हूं। उन्होंने कभी मेरी मुलाकात नहीं की, लेकिन हेमा जी के सांसद बनने पर पत्र लिखा था। उनकी फिल्में जैसे ‘शोले’ और ‘चुपके चुपके’ ने देशभक्ति का संदेश दिया। 90 वर्ष की उम्र में भी उनका जाना अपूरणीय क्षति है।” शाह ने आगे कहा, “धर्म जी किसान के बेटे थे, देशप्रेमी थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।” वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और बीजेपी सांसद कंगना रनौत, रवि किशन, हर्ष मल्होत्रा व बांसुरी स्वराज भी पहुंचे।

हेमा मालिनी ने इमोशनल भाषण दिया। आंसुओं से भरी आवाज में बोलीं, “मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि धर्म जी के लिए शोकसभा करनी पड़ेगी। दुनिया रो रही है, लेकिन मेरे लिए यह साथ टूटने का सदमा है। वे हमेशा खुशमिजाज रहे, शोहरत के चरम पर भी जमीन से जुड़े। उन्होंने मुझे हर कदम पर सहारा दिया।” उन्होंने धर्मेंद्र के अधूरे सपनों का जिक्र किया, “वे शेर सुनाने के शौकीन थे। मैंने कहा था कि किताब लिखें—फैंस को पसंद आएगी। वे गंभीर थे, प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन वह काम अधूरा रह गया।” ईशा देवल ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर लिखा, “पापा, हमारा वादा हमेशा साथ—स्वर्ग हो या धरती।”

सिनेमा के जानकारों का मानना है कि धर्मेंद्र का जाना हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग का अंत है। ‘शोले’, ‘सत्याकाम’ जैसी फिल्मों से अमर हुए ही-मैन की सादगी ने सभी को प्रभावित किया। शोकसभा में सादगी भरा माहौल रहा—फूलमालाओं के साथ श्रद्धांजलि। क्या यह आयोजन उनकी विरासत को अमर रखेगा? फैंस की आंखें नम हैं।

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