राजनीति

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में 10 घंटे की बहस: पीएम मोदी करेंगे शुरुआत

वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में 10 घंटे की बहस: पीएम मोदी करेंगे शुरुआत

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना को 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में विशेष बहस का आयोजन किया जा रहा है। लोकसभा में सोमवार (8 दिसंबर) को दोपहर 12 बजे से शुरू होने वाली 10 घंटे की इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। राज्यसभा में मंगलवार (9 दिसंबर) को गृह मंत्री अमित शाह बहस का उद्घाटन करेंगे। यह बहस शीतकालीन सत्र का हिस्सा है, जो 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगी। वंदे मातरम, जो बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में लिखी गई थी, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा स्रोत रही है। पीएम मोदी ने 7 नवंबर को इसकी वर्षगांठ पर वर्ष भर के उत्सवों का शुभारंभ किया था।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता वाली ऑल पार्टी मीटिंग में यह तय हुआ कि बहस में गीत के ऐतिहासिक महत्व, कम ज्ञात तथ्यों और सांस्कृतिक योगदान पर फोकस होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “8 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा, जिसकी शुरुआत पीएम मोदी करेंगे।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बहस के समापन पर बोलेंगे। विपक्षी दलों ने भी सक्रियता दिखाई है। कांग्रेस ने आठ सांसदों की सूची जारी की, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, उपनेता गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल अकोइजम (मणिपुर), प्रणिति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत शामिल हैं। प्रियंका और गोगोई प्रमुख वक्ता होंगी।

यह बहस राजनीतिक रंग भी ले सकती है। पीएम मोदी ने 7 नवंबर को कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि 1937 में पार्टी ने गीत के प्रमुख छंद हटा दिए, जिससे विभाजन की नींव पड़ी। कांग्रेस ने इसका खंडन किया, कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर पहले दो छंद ही अपनाए गए थे, ताकि सभी धर्मों का सम्मान हो। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने कहा, “मोदी टैगोर को विभाजनकारी कह रहे हैं, जो शर्मनाक है।” विपक्ष का मानना है कि यह बहस चुनाव सुधारों पर ध्यान भटकाने का प्रयास है, जिस पर मंगलवार (9 दिसंबर) को 10 घंटे की अलग चर्चा होगी, जहां राहुल गांधी बोलेंगे।

वंदे मातरम, जो ‘अनंदमठ’ उपन्यास का हिस्सा है और रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा संगीतबद्ध की गई, राष्ट्रगान का दर्जा तो नहीं पा सकी, लेकिन राष्ट्रीय गीत बनी। यह बहस युवाओं और छात्रों में इसके महत्व को बढ़ावा देगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चर्चा से गीत की सांस्कृतिक विरासत मजबूत होगी। क्या यह बहस एकता का प्रतीक बनेगी या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मैदान? सभी की नजरें पीएम के भाषण पर टिकी हैं।

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