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ट्रंप का भारत पर टिप्पणी: ‘न्यायसंगत व्यापार समझौते’ से काफी करीब, टैरिफ कम करने का संकेत

ट्रंप का भारत पर टिप्पणी: ‘न्यायसंगत व्यापार समझौते’ से काफी करीब, टैरिफ कम करने का संकेत

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश “न्यायसंगत व्यापार समझौते” पर पहुंचने के “काफी करीब” हैं। साथ ही, ट्रंप ने भारत पर लगाए गए शुल्क (टैरिफ) को “किसी समय” कम करने का इशारा किया। यह बयान सोमवार को ओवल ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान आया, जहां उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका के नए राजदूत के रूप में शपथ दिलाई। ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “हम भारत के साथ एक समझौता कर रहे हैं, यह पहले की तुलना में बहुत अलग है। इसलिए अभी वे मुझे पसंद नहीं करते लेकिन वे हमें फिर से पसंद करेंगे।”

ट्रंप का यह बयान भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम एक न्यायसंगत सौदा कर रहे हैं, बस एक न्यायसंगत व्यापार समझौता।” ट्रंप ने भारत को “सबसे तेजी से बढ़ती मध्यम वर्ग” वाली अर्थव्यवस्था बताते हुए इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक साझेदार कहा। यह टिप्पणी तब आई जब ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए 50% टैरिफ का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूसी तेल की खरीद “बहुत कम” कर दी है, और “कुछ समय में” टैरिफ कम कर दिए जाएंगे।

व्यापार वार्ताओं का बैकग्राउंड: 5 दौर की बातचीत, ‘फॉल 2025’ तक सौदा

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातें मार्च 2025 से चल रही हैं। अब तक 5 दौर की वार्ता हो चुकी है, जो द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर केंद्रित है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 5 नवंबर को कहा था कि बातें “बहुत अच्छी तरह” चल रही हैं, लेकिन “कई संवेदनशील और गंभीर मुद्दे” हैं, जिसके कारण समय लगेगा। शुरू में सौदे को 2025 के “फॉल” (सितंबर-अक्टूबर) तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य था, लेकिन अब ट्रंप के बयान से लगता है कि यह दिसंबर 2025 तक संभव है।

यह समझौता आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करेगा। अमेरिका के लिए इसका मतलब है कि भारत से ऊर्जा निर्यात बढ़ेगा, जैसे LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और रिन्यूएबल एनर्जी। भारत के लिए अमेरिकी निवेश बढ़ेगा, खासकर सेमीकंडक्टर, डिफेंस और टेक्नोलॉजी सेक्टर में। ट्रंप ने कहा, “यह सौदा पहले के मुकाबले बहुत अलग होगा। हम न्यायसंगत सौदा कर रहे हैं।” वर्तमान में भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 190 अरब डॉलर के आसपास है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर टैरिफ लगाकर दबाव बनाया था।

ट्रंप का अंदाज: ‘वे मुझे पसंद नहीं करते, लेकिन फिर पसंद करेंगे’

ट्रंप का बयान उनकी विशिष्ट शैली में था – हल्का-फुल्का लेकिन साफ संदेश। उन्होंने कहा, “अभी वे मुझे पसंद नहीं करते, लेकिन वे हमें फिर से पसंद करेंगे।” यह टिप्पणी भारत पर लगे टैरिफ और व्यापार घाटे (अमेरिका का भारत के साथ 30 अरब डॉलर का घाटा) को संदर्भित करती है। ट्रंप ने पहले भारत को “टैरिफ किंग” कहा था, लेकिन अब सकारात्मक मोड़ ले लिया। राजदूत सर्जियो गोर की शपथ के दौरान ट्रंप ने भारत को “इंडो-पैसिफिक में महत्वपूर्ण साझेदार” बताया। गोर, जो ट्रंप के करीबी हैं, भारत में अमेरिकी हितों को मजबूत करेंगे।

भारत की प्रतिक्रिया: गोयल ने कहा ‘निकट भविष्य में सौदा’

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने ट्रंप के बयान का स्वागत किया। मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “वार्ता अच्छी चल रही है। निकट भविष्य में सौदा संभव।” 23 अक्टूबर को वर्चुअल मीटिंग हुई थी, जहां ऊर्जा, निवेश और डिफेंस पर फोकस था। भारत ने रूसी तेल की खरीद कम करने का आश्वासन दिया, लेकिन MEA ने इसे “सहयोगी कदम” बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा भारत को अमेरिकी बाजार में आसानी देगा, खासकर फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी सेक्टर में।

व्यापारिक प्रभाव: टैरिफ कम होने से लाभ

ट्रंप ने कहा कि रूसी तेल के कारण लगे “बहुत ऊंचे टैरिफ” कम होंगे। भारत ने 2024-25 में रूस से 40 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जो अमेरिकी टैरिफ का कारण बना। सौदा होने पर टैरिफ 50% से घटकर 10-15% हो सकता है, जिससे भारत का निर्यात बढ़ेगा। अमेरिका के लिए ऊर्जा निर्यात (LNG) 20% बढ़ेगा। यह सौदा QUAD (क्वाड) और I2U2 जैसे फोरम को मजबूत करेगा।

ट्रंप का यह बयान अमेरिका के 2026 चुनाव से पहले आया, जो उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को बैलेंस करता है। भारत-अमेरिका संबंधों में यह नया अध्याय साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सौदा 2025 के अंत तक फाइनल हो सकता है।

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