लैंड फॉर जॉब घोटाला: दिल्ली कोर्ट ने लालू यादव समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला 4 दिसंबर तक टाला
लैंड फॉर जॉब घोटाला: दिल्ली कोर्ट ने लालू यादव समेत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला 4 दिसंबर तक टाला
लैंड फॉर जॉब घोटाले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (फ्रेमिंग ऑफ चार्जेस) पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला टाल दिया है। स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने सुनवाई को 4 दिसंबर 2025 तक के लिए स्थगित कर दिया। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है, जिसमें 2004-09 के दौरान रेल मंत्रालय में ग्रुप डी की नौकरियां देने के बदले बिहार में जमीन हस्तांतरित करने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाएगा, ताकि तर्क सुने जा सकें।
यह घोटाला लालू यादव के रेल मंत्री कार्यकाल से जुड़ा है। CBI के अनुसार, लालू ने रेलवे के माध्यम से नौकरियां दिलाने के एवज में पटना और पुरी में होटलों के मालिकों से जमीनें लीं, जो बाद में उनके परिवार के नाम पर ट्रांसफर हो गईं। चार्जशीट में 16 से अधिक आरोपी हैं, जिनमें लालू, राबड़ी, तेजस्वी, मीसा भारती और AK इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। कोर्ट ने पहले ही 13 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC एक्ट) के तहत धारा 120B (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) समेत आरोप तय किए हैं, लेकिन पूर्ण फ्रेमिंग पर बहस जारी है। जज गोग्ने ने कहा, “सार्वजनिक धन का नुकसान हुआ, लालू ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया।” CBI ने लालू को “किंगपिन” बताया है।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने देरी की मांग की, जिसमें CBI के तर्कों का जवाब देने के लिए समय मांगा गया। लेकिन कोर्ट ने सख्ती बरती और कहा कि जानबूझकर देरी की कोशिशें अस्वीकार्य हैं। इससे पहले, अगस्त में वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टाली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में लालू की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें ट्रायल रोकने की मांग थी। SC ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट में क्वाशिंग पिटिशन का फैसला ट्रायल को प्रभावित करेगा, लेकिन फिलहाल आगे बढ़ें।
आरजेडी ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया। लालू के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, “यह BJP का बदला है, सबूत कमजोर हैं।” वहीं, BJP ने इसे “भ्रष्टाचार पर लगाम” का उदाहरण बताया। बिहार चुनाव से पहले यह मामला तेजस्वी की छवि पर असर डाल सकता है। CBI ने 103 संभावित आरोपियों की सूची दी है, जिनमें रेलवे अधिकारी भी हैं। जांच में पाया गया कि नौकरियों के लिए कोई योग्यता जांच नहीं हुई, सिर्फ जमीन दान की शर्त थी।
कोर्ट ने सभी को 4 दिसंबर को पेश होने का निर्देश दिया। अगर आरोप तय होते हैं, तो ट्रायल तेज होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला PC एक्ट के तहत मजबूत है, लेकिन लालू की मेडिकल कंडीशन (किडनी समस्या) को ध्यान में रखा जा सकता है। फिलहाल, हाईकोर्ट में FIR क्वाश करने की सुनवाई दिसंबर में है। यह घोटाला सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण है, जो राजनीतिक गलियारों को हिला रहा है।
