उत्तराखंड

CBI ने शुरू की UKSSSC पेपर लीक केस की जांच, SIT से कब्जे में ली फाइलें और जांच डायरी

CBI ने शुरू की UKSSSC पेपर लीक केस की जांच, SIT से कब्जे में ली फाइलें और जांच डायरी

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आधिकारिक तौर पर जांच शुरू कर दी है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के 36 दिन बाद सोमवार को CBI टीम ने राज्य की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से सभी महत्वपूर्ण फाइलें, जांच डायरी और सबूतों का कब्जा ले लिया। यह कदम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सिफारिश पर आधारित है, जो छात्र आंदोलन के दबाव में आया। SIT की इंटरिम रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का जिक्र था, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। CBI का दावा है कि यह जांच पूर्ण निष्पक्षता से होगी, और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।

21 सितंबर को आयोजित UKSSSC की ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के दौरान ही तीन पेजों के प्रश्नपत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के अंदर ही लीक हो गए सवालों ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया। छात्र संगठनों ने इसे ‘सिस्टम की साजिश’ बताते हुए व्यापक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें परीक्षा रद्द करने, UKSSSC चेयरमैन का इस्तीफा और CBI जांच की मांग की गई। देहरादून के परेड ग्राउंड पर सैकड़ों युवाओं ने धरना दिया, जो एक हफ्ते चला। सीएम धामी ने 29 सितंबर को छात्रों से मुलाकात कर CBI जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन स्थगित हो गया।

SIT, जो रिटायर्ड हाईकोर्ट जज यू.सी. ध्यानी की अगुवाई में बनी थी, ने 11 अक्टूबर को इंटरिम रिपोर्ट सीएम को सौंपी। रिपोर्ट में राज्य की भर्ती प्रक्रिया में गंभीर खामियों का खुलासा हुआ, जिसमें जामर लगे होने के बावजूद फोटो क्लिक करने और लीक करने की साजिश शामिल थी। SIT ने मुख्य आरोपी खालिद मलिक को गिरफ्तार किया, जो परीक्षा केंद्र से डिवाइस लेकर सवालों की फोटो खींचकर अपनी बहन सबिया के जरिए शेयर कर रहा था। खालिद ने OMR शीट में लीक उत्तर भरने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। अन्य गिरफ्तारियां में हाकम सिंह रावत (2021 लीक का आरोपी) और उनके साथी पंकज गौर शामिल हैं, जो उम्मीदवारों से 12-15 लाख रुपये वसूल रहे थे। SIT ने चार नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ रायपुर थाने में केस दर्ज किया, जो उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश 2023 के तहत है।

CBI टीम ने सोमवार को देहरादून पहुंचकर SIT कार्यालय से सभी दस्तावेज ले लिए। इसमें जांच डायरी, गिरफ्तार आरोपियों के बयान, मोबाइल फोन, डिवाइस और सोशल मीडिया स्क्रीनशॉट्स शामिल हैं। CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम पूरे नेटवर्क को उजागर करेंगे, जिसमें UKSSSC अधिकारी, परीक्षा केंद्र स्टाफ और बाहरी गिरोह शामिल हो सकते हैं।” केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद यह पहला बड़ा कदम है, जो राज्य सरकार की सिफारिश पर 27 अक्टूबर को जारी हुई। UKSSSC चेयरमैन गणेश सिंह मार्टोलिया ने लीक को ‘सीमित’ बताया था, लेकिन छात्रों ने इसे खारिज कर दिया। परीक्षा रद्द होने से हजारों उम्मीदवार प्रभावित हुए, और 12 अक्टूबर की कृषि विभाग भर्ती भी स्थगित कर दी गई।

यह मामला उत्तराखंड के भर्ती घोटालों की कड़ी का हिस्सा है। 2021 में भी UKSSSC परीक्षाएं रद्द हुईं थीं, जब पेपर लीक का बड़ा स्कैंडल सामने आया था। छात्र संगठन स्वाभिमान मोर्चा के त्रिभुवन चौहान ने कहा, “CBI जांच से सच्चाई सामने आएगी। हम नई परीक्षा और दोषियों को उम्रकैद की सजा चाहते हैं।” सीएम धामी ने कहा, “यह सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश थी। CBI को पूरा सहयोग देंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।” विशेषज्ञों का मानना है कि CBI जांच से न केवल इस केस का पटाक्षेप होगा, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

फिलहाल, CBI ने गोपनीयता बनाए रखी है, लेकिन जल्द ही आरोपी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जा सकते हैं। छात्रों ने राहत की सांस ली है, लेकिन नई परीक्षा की तारीख का इंतजार कर रहे हैं। यह घटना नौकरी की आस में जूझते युवाओं के संघर्ष को उजागर कर रही है।

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