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हिंदू जातियों के आगे ‘क्रिश्चियन’ पहचान पर हंगामा: कर्नाटक कास्ट सर्वे पर विवाद, स्थगन की मांग तेज

हिंदू जातियों के आगे ‘क्रिश्चियन’ पहचान पर हंगामा: कर्नाटक कास्ट सर्वे पर विवाद, स्थगन की मांग तेज

बेंगलुरु: कर्नाटक में प्रस्तावित सामाजिक-आर्थिक एवं शैक्षिक सर्वे (कास्ट सर्वे) पर विवाद ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ड्राफ्ट सूची में 50 से अधिक हिंदू जातियों (दलित, ओबीसी और ऊपरी जातियां) के आगे ‘क्रिश्चियन’ शब्द जोड़ने पर भाजपा और विभिन्न हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। भाजपा ने इसे ‘हिंदू समुदायों को क्रिश्चियन लेबल करने की साजिश’ करार देते हुए सर्वे रद्द करने की मांग की है, जबकि कांग्रेस सरकार ने इसे सामाजिक न्याय का हिस्सा बताया है। सर्वे 22 सितंबर से शुरू होने वाला था, लेकिन विवाद के चलते इसे स्थगित करने की संभावना बढ़ गई है।

आयोग की सूची में कुरुबा क्रिश्चियन, वोक्कालिगा क्रिश्चियन, बिल्लावा क्रिश्चियन, ब्राह्मण क्रिश्चियन, एडीगा क्रिश्चियन, माडिगा क्रिश्चियन और लंबाणी क्रिश्चियन जैसी 47-52 नई ‘उप-जातियां’ शामिल हैं। भाजपा का आरोप है कि यह वर्गीकरण क्रिश्चियन समुदाय को हिंदू ओबीसी समूहों में शामिल करने का प्रयास है, जो धार्मिक रूपांतरण को बढ़ावा देगा और आरक्षण लाभों को प्रभावित करेगा। राज्य भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा, “यह अल्पसंख्यकों को खुश करने की साजिश है, जो हिंदू समुदायों के हक छीन लेगी। एंटी-कन्वर्जन लॉ को कमजोर करने का यह तरीका है।” भाजपा नेताओं ने राज्यपाल थावारचंद गहलोत से मिलकर हस्तक्षेप की मांग की और 10 जिलों में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।

विपक्ष के हमलों के बीच कर्नाटक के मंत्री, खासकर वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदायों से, ने कैबिनेट बैठक में आपत्ति जताई। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्री सर्वे को स्थगित या रद्द करने के पक्ष में हैं, क्योंकि सूची में 331 जातियां/उप-जातियां (कई क्रिश्चियन और मुस्लिम उप-समूह) शामिल हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “सर्वे सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन की पहचान के लिए है, जिसमें धार्मिक पहचान भी शामिल है। हिंदू समाज में समानता न होने से ही रूपांतरण होते हैं।” डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार ने भी सर्वे जारी रखने पर जोर दिया, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने ‘नई जातियों’ को हटाने की सलाह दी है। आयोग के चेयरमैन माधुसूदन नायक ने स्पष्ट किया, “लोग खुद को क्रिश्चियन के साथ जाति बताते हैं, हम उन्हें बाहर नहीं कर सकते। इससे आरक्षण लाभ नहीं मिलेगा।”

क्रिश्चियन समुदाय में भी दुविधा है। आर्कबिशप माचाडो ने कहा, “हमने ईसाइयों से स्वतंत्र रूप से पहचान चुनने को कहा है—या तो जाति क्रिश्चियन या सिर्फ क्रिश्चियन।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह वर्गीकरण रूपांतरण को ‘सामान्य’ बनाएगा, क्योंकि क्रिश्चियन वर्तमान में एससी/एसटी आरक्षण से वंचित हैं (जो केवल हिंदू, सिख और बौद्धों के लिए है)। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, कर्नाटक में रूपांतरण के मामले बढ़ रहे हैं, और यह सर्वे नीतियों को प्रभावित कर सकता है।

यह विवाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के लिए चुनौती बन गया है, जो कास्ट सर्वे को चुनावी वादे के रूप में पेश कर रही थी। भाजपा और संगठनों ने 10 जिलों में विरोध सभाएं आयोजित करने का ऐलान किया है, जबकि हिंदू साधु-संत भी इसमें शामिल हो रहे हैं। क्या सर्वे स्थगित होगा या संशोधित सूची के साथ चलेगा? सभी की नजरें 22 सितंबर पर टिकी हैं। यह मुद्दा न केवल कर्नाटक, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर आरक्षण और रूपांतरण बहस को हवा दे सकता है।

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