सिर्फ नाच रहा, गा रहा… अपने छोटे भाई के विधानसभा राघोपुर पहुंचे तेज प्रताप, बोले- तेजस्वी फेल
‘आप शांत रहिए कैसे बांटना है हम बांट रहे हैं न. सरकार आपकी मदद नहीं कर रहा है, लेकिन मैं बांट रहा हूं. सरकार आपका फेल है और विधायक भी आपका फेल है नांच रहा है गा रहा है…’ लालू यादव के बड़े लाल तेज प्रताप यादव बुधवार को जब तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर पहुंचे तो उनके श्रीमुख से ये शब्द निकले. तेज प्रताप यादव बाढ़ग्रस्त इलाके में कंबल और भोजन बांटने आए थे. नाव पर सवार होकर तेज प्रताप ने माइक थामकर लालू के अंदाज में लोगों से मुखातिब हुए. लालू के अंदाज में ही उन्होंने लोगों को शांत रहने की अपील की और साथ में क्षेत्र के विधायक आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव को भी नाम नहीं लेते हुए नाम लेकर निशाने पर लिया. तेज प्रताप का यह अंदाज सोशल मीडिया पर अब खूब वायरल हो रहा है.
बिहार की राजनीति में एक बार फिर पारिवारिक कलह की आंच तेज हो गई है. इस बार बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने निशाना किसी और पर नहीं, बल्कि अपने छोटे भाई और पार्टी के सीएम फेस तेजस्वी यादव पर ही साधा है. दरअसल, बुधवार को तेज प्रताप यादव अपने भाई तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र राघोपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत सामग्री, राशन और कंबल बांटने पहुंचे थे. जब वह नाव पर सवार होकर लोगों को संबोधित कर रहे थे, तो भीड़ के बीच से कुछ आवाजें आ रही थीं. इसी दौरान उन्होंने माइक थामकर जो कहा, वह अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. तेज प्रताप ने कहा, ‘आप शांत रहिए… कैसे बांटना है हम बांट रहे हैं न. सरकार आपकी मदद नहीं कर रहा है, लेकिन मैं बांट रहा हूं. सरकार आपका फेल है और विधायक भी आपका फेल है नांच रहा है गा रहा है…’.
क्यों जमकर बरसे तेज प्रताप?
तेजस्वी की गैरमौजूदगी में जिस समय तेज प्रताप राघोपुर में लोगों के बीच मौजूद थे, उस समय तेजस्वी यादव खुद अपने क्षेत्र से नदारद थे. तेज प्रताप ने इसी बात को मुद्दा बनाकर उन पर सीधा हमला किया. उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि जहां विधायक जनता से दूर हैं, वहीं वह खुद लोगों के बीच आकर उनकी मदद कर रहे हैं. तेज प्रताप का यह अंदाज उनके पिता लालू यादव से काफी मिलता-जुलता है. लालू भी हमेशा सीधे जनता से जुड़कर अपनी राजनीति करते थे. तेज प्रताप ने खुद को लालू की राजनीति का असली वारिस साबित करने की कोशिश की है, जबकि तेजस्वी को वह आधुनिक और शहरी राजनीति से जुड़ा हुआ दिखाना चाहते हैं.
तेज प्रताप यादव आरजेडी और परिवार से बाहर हैं. तेज प्रताप का यह कदम अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करने का एक प्रयास है. तेज प्रताप का यह बयान सिर्फ एक पारिवारिक कलह नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है. इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि परिवार में सब कुछ ठीक नहीं है.
एनडीए को आरजेडी पर हमला करने का एक और मौका मिल गया है. बीजेपी और जेडीयू अब यह कह सकते हैं कि जो पार्टी अपने ही परिवार को एकजुट नहीं रख सकती, वह बिहार का शासन कैसे चलाएगी. तेजस्वी यादव अपनी छवि को एक युवा और आधुनिक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेज प्रताप के इस बयान ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया है. तेजस्वी को अब न केवल विपक्ष से लड़ना है, बल्कि अपने ही घर की चुनौतियों का भी सामना करना है.
