उत्तराखंड

मसूरी की साहित्यिक गूंज: ‘The Echoes of Landour’ के साथ राघव और राज बिजल्वाण की नई पेशकश

मसूरी की साहित्यिक गूंज: ‘The Echoes of Landour’ के साथ राघव और राज बिजल्वाण की नई पेशकश

मसूरी, उत्तराखंड: “क्वीन ऑफ हिल्स” के नाम से मशहूर मसूरी अब न केवल पर्यटन की नगरी है, बल्कि साहित्यिक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही है। मसूरी के दो युवा लेखक, राघव बिजल्वाण और राज बिजल्वाण, अपनी चौथी पुस्तक ‘The Echoes of Landour: A Resonant Longing’ के साथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस काव्य संग्रह का विमोचन 5 सितंबर, 2025 को मसूरी में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी द्वारा किया जाएगा।

किताब में क्या है खास?

The Echoes of Landour: A Resonant Longing दो हिस्सों में बंटी है:

1. ‘The Testimony of Our Times’: यह हिस्सा मसूरी और लैंडौर के बदलते स्वरूप, भीड़भाड़, प्रदूषण और अनियोजित विकास के दबाव को दर्शाता है।

2. ‘Longing to Be Named’: इसमें अतीत की यादों और वर्तमान की चुनौतियों के बीच का भावनात्मक संघर्ष उभरकर सामने आता है।

लेखकों का कहना है कि मसूरी अब पहले जैसा नहीं रहा। अनियोजित विकास और पर्यावरणीय संकट ने इस शहर की आत्मा को ठेस पहुंचाई है। फिर भी, वे उम्मीद बंधाते हैं: “सुरंग के अंत में रोशनी है, और मसूरी को बचाया जा सकता है।”

लेखक कौन हैं?

राघव और राज बिजल्वाण भाई हैं और मसूरी के हैम्पटन कोर्ट स्कूल के पूर्व छात्र हैं। दोनों ने ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की, जहां राघव को गोल्ड मेडल और राज को सिल्वर मेडल मिला। वे अब तक तीन पुस्तकें लिख चुके हैं:

– Devotion Through the Darkness

– Timeless Tales

– Longings of Landour

वर्तमान में राघव अंग्रेजी शिक्षक हैं, जबकि राज भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) पर शोध कर रहे हैं।

राष्ट्रीय महत्व

यह काव्य संग्रह सिर्फ मसूरी की कहानी नहीं, बल्कि भारत के उन तमाम पहाड़ी शहरों की आवाज है जो आधुनिकीकरण और अनियोजित विकास के कारण अपनी पहचान खो रहे हैं। उत्तराखंड, हिमाचल, दार्जिलिंग और नॉर्थ-ईस्ट के हिल स्टेशनों में बढ़ता पर्यटन और पर्यावरणीय संकट एक साझा चुनौती है। यह किताब पाठकों को शहरों की आत्मा को संरक्षित करने का संदेश देती है।

विमोचन समारोह

– तारीख: 5 सितंबर, 2025

– स्थान: मसूरी

– मुख्य अतिथि: नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी

यह आयोजन साहित्य प्रेमियों और मसूरी की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े लोगों के लिए खास होगा।

एक सशक्त पुकार

The Echoes of Landour: A Resonant Longing केवल एक किताब नहीं, बल्कि मसूरी और लैंडौर के भविष्य को बचाने की भावनात्मक अपील है। यह साहित्य, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर राष्ट्रीय स्तर की बहस को जन्म दे सकती है।

यह किताब हर उस व्यक्ति के लिए है जो पहाड़ों की सुंदरता और उनकी आत्मा को सहेजना चाहता है।

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