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पिथौरागढ़ में बड़ा टनल हादसा! धारचूला में भूस्खलन से 11 NHPC कर्मचारी फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पिथौरागढ़ में बड़ा टनल हादसा! धारचूला में भूस्खलन से 11 NHPC कर्मचारी फंसे, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में रविवार को भारी बारिश के कारण भयानक भूस्खलन हो गया, जिससे एनएचपीसी (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन) के धौलीगंगा जलविद्युत परियोजना की टनल का मुहाना पूरी तरह बंद हो गया। इस हादसे में 19 कर्मचारी टनल के अंदर फंस गए थे। राहत की बात यह है कि अब तक 8 कर्मचारियों को सकुशल बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन अभी भी 11 लोग फंसे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चल रहा है, और प्रशासन ने शाम तक सभी को बाहर निकालने का लक्ष्य रखा है। यह घटना राज्य में लगातार हो रही आपदाओं की याद दिलाती है, जहां भारी बारिश ने कई जिलों को तबाह कर दिया है।

घटना धारचूला के पास एलागढ़ क्षेत्र में धौलीगंगा पावर प्रोजेक्ट के पास हुई। लगातार बारिश से पहाड़ दरक गया, और बड़े-बड़े पत्थरों व मलबे ने टनल के सामान्य और आपातकालीन दोनों प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध कर दिया। पिथौरागढ़ के एसपी रेखा यादव ने बताया कि फंसे कर्मचारी कंपनी और प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं, और उनके पास पर्याप्त राशन उपलब्ध है। वे सुरक्षित हैं, लेकिन मलबा हटाने का काम चुनौतीपूर्ण है। धारचूला उप-जिला मजिस्ट्रेट जितेंद्र वर्मा ने कहा, “सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की जेसीबी मशीनें मलबा हटाने में लगी हैं। शाम तक रास्ता साफ हो जाएगा, और सभी कर्मचारी बाहर आ सकेंगे।” पावर स्टेशन का बिजली उत्पादन सामान्य रूप से चल रहा है, और इससे कोई असर नहीं पड़ा है।

रेस्क्यू टीमों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। एनएचपीसी अधिकारियों ने बताया कि फंसे कर्मचारियों को वॉकी-टॉकी से बातचीत के जरिए आश्वासन दिया जा रहा है। जेसीबी और अन्य भारी मशीनरी मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार मलबा गिरने से काम धीमा हो रहा है। अब तक 8 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जो अब सुरक्षित स्थान पर हैं। बाकी 11 को निकालने के लिए प्रयास तेज हैं। इस बीच, धारचूला-तवागत राष्ट्रीय राजमार्ग भी भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया है, जिससे कई वाहन फंस गए हैं। स्थानीय लोग डरे हुए हैं, क्योंकि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।

यह हादसा उत्तराखंड में मानसून की तबाही का हिस्सा है। पिछले कुछ दिनों में रुद्रप्रयाग, चंपावत, नैनीताल और अन्य जिलों में बादल फटने और भूस्खलन से दर्जनों मौतें हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया है और केंद्र से अतिरिक्त मदद मांगी है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें पूरे राज्य में राहत कार्यों में लगी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए पहाड़ी इलाकों में निर्माण और सड़क परियोजनाओं में सावधानी बरतनी होगी। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने और अलर्ट पर नजर रखने की सलाह दी है। उम्मीद है कि जल्द ही बाकी फंसे कर्मचारियों को भी बचा लिया जाएगा, और राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत बनेगी।

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