धर्म

गणपति स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल

गणपति स्थापना में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल

गणेश चतुर्थी का पर्व नजदीक है और इस साल 27 अगस्त 2025 से यह उत्सव शुरू होने जा रहा है। यह पर्व पूरे देश में, विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में, बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता और बुद्धि-समृद्धि के दाता माना जाता है, की मूर्ति स्थापना और पूजा के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अगर इनमें जरा सी भी चूक हो जाए, तो पूजा का फल नहीं मिलता और भक्तों को नकारात्मक प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं गणपति स्थापना और पूजा के दौरान किन 7 गलतियों से बचना चाहिए।

1. टूटी-फूटी मूर्ति का उपयोग न करें

भगवान गणेश की पूजा में कभी भी टूटी-फूटी या अधूरी मूर्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसी मूर्ति को अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का फल नहीं मिलता। मूर्ति खरीदते समय सुनिश्चित करें कि वह पूर्ण और दोषरहित हो।

2. दक्षिणावर्ती शंख का प्रयोग न करें

जैसे शिव पूजा में दक्षिणावर्ती शंख वर्जित है, वैसे ही गणेश पूजा में भी इसका उपयोग अशुभ माना जाता है। पूजा के दौरान सामान्य शंख का ही प्रयोग करें।

3. गलत दिशा में मूर्ति स्थापना

गणपति की मूर्ति को हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में मुख करके स्थापित करें। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है और बप्पा की कृपा प्राप्त होती है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में मूर्ति रखने से बचें।

4. नीले या काले वस्त्र न पहनें  

गणपति पूजा के दौरान नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करने से बचें। बप्पा को लाल, पीला या सिंदूरी रंग प्रिय है, इसलिए इन रंगों के वस्त्र पहनें और लाल फूल अर्पित करें।

5. तुलसी का उपयोग न करें

गणेश पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे ठुकराने पर तुलसी ने उन्हें शाप दिया था। इसलिए गणेश पूजा में दूर्वा (दूब घास) का उपयोग करें, जो बप्पा को अति प्रिय है।

6. एक से अधिक मूर्तियां न रखें

घर में एक समय में गणपति की केवल एक मूर्ति स्थापित करें। यदि आपके पास पुरानी मूर्ति है, तो उसे विसर्जित करें या किसी मंदिर में स्थापित करें। एक साथ दो मूर्तियां रखना अशुभ माना जाता है।

7. अंधेरे में पूजा न करें

गणपति की मूर्ति के पास हमेशा उजाला रखें। अंधेरे में मूर्ति के दर्शन करना या पूजा करना अशुभ माना जाता है। पूजा स्थल पर दीपक या फल लाइट जलाकर रौशनी सुनिश्चित करें।

अतिरिक्त सुझाव

– गणेश उत्सव के दौरान सात्विक भोजन करें। लहसुन, प्याज, मांस और शराब का सेवन न करें।

– मूर्ति स्थापना शुभ मुहूर्त में करें। इस साल गणेश चतुर्थी पर स्थापना का शुभ मुहूर्त 27 अगस्त को सुबह 10:51 बजे से दोपहर 1:21 बजे तक रहेगा।

– मूर्ति खरीदते समय ध्यान दें कि वह बैठी या लेटी मुद्रा में हो और उसकी सूंड बाईं ओर हो। इसमें मोदक और मूषक (चूहा) का होना शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी का पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार और समाज को एकजुट करने का अवसर भी है। यदि आप सही विधि-विधान और श्रद्धा के साथ गणपति की स्थापना और पूजा करते हैं, तो आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा। इन गलतियों से बचकर आप बप्पा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा-पाठ से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले अपने गुरु या ज्योतिषी से सलाह लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *