PoK में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और ड्रोन हमले में 7 की मौत, कई घायल
PoK में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी और ड्रोन हमले में 7 की मौत, कई घायल
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई और लगभग 20-23 लोग घायल हो गए। यह घटना 5 नवंबर 2026 को सुबह फजर की नमाज के बाद हुई, जब रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) और स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन स्थलों पर कार्रवाई शुरू की।
क्या हुआ?
प्रदर्शनकारी जून 2026 से रावलकोट बस टर्मिनल और अन्य जगहों (जैसे उमर फारूक चौक) पर बैठे हुए थे। वे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में 38-सूत्री मांगपत्र लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसमें सस्ती बिजली, राशन, शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और महंगाई से राहत जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। हजारों लोग शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे।
सुरक्षा बलों ने गोलीबारी, आंसू गैस और लाठीचार्ज के साथ कार्रवाई की। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्रोन से भी हमले हुए, एक घर जलने की खबरें आईं। कुछ रिपोर्ट्स में आरपीजी जैसे हथियारों का भी जिक्र है। शुरुआती दो घंटों में ही मौतें और घायल होने की खबरें आईं।
पृष्ठभूमि
यह आंदोलन जून 2025-26 से चल रहा है। लोग महंगाई, बिजली के ऊंचे बिल, राशन की कमी और इस्लामाबाद के नियंत्रण के खिलाफ सड़क पर हैं। JAAC को पाकिस्तान ने आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था, लेकिन प्रदर्शन जारी रहे। पिछले महीनों में भी कई मौतें हुईं। कुछ आंकड़ों के अनुसार जून से अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 150 के पार बताया जा रहा है (सटीक आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में भिन्न हैं)। एक कार्यकर्ता डॉ. अमजद अय्यूब मिर्जा ने पांच महीनों में 119 मौतों और सैकड़ों घायलों का आरोप लगाया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निहत्थे हैं और सिर्फ अधिकार मांग रहे हैं। सुरक्षा बलों की ओर से यह दावा किया जाता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं।
आगे की स्थिति
रावलकोट में धरना जारी है। मुजफ्फराबाद में छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं। इंटरनेट बाधित रहने और संचार पर पाबंदी की खबरें भी हैं। मानवाधिकार संगठन और कुछ अंतरराष्ट्रीय आवाजें इस पर चिंता जता चुकी हैं।
अपडेट: घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ा है। प्रदर्शनकारी अपने मृतकों को लेकर और अधिकारों की मांग पर अड़े हुए हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक बयान अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।
(नोट: मौतों के आंकड़े विभिन्न स्रोतों—भारतीय मीडिया, स्थानीय कार्यकर्ताओं और रिपोर्ट्स—पर आधारित हैं। स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित है।)

