तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, चल विग्रह डोली मक्कूमठ के लिए रवाना
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद, चल विग्रह डोली मक्कूमठ के लिए रवाना
रुद्रप्रयाग:
उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। इसी के साथ वर्ष 2026 की तुंगनाथ धाम की ग्रीष्मकालीन यात्रा का औपचारिक समापन हो गया है। समुद्रतल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ में कपाट बंद होने के इस अवसर पर भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ भोलेनाथ के जयकारे लगाए। मंदिर परिसर को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था, जहां पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया।
कपाट बंद होने के पश्चात भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान कर चुकी है। तय कार्यक्रम के अनुसार डोली का पहला रात्रि प्रवास चोपता में होगा। इसके बाद 7 नवंबर को डोली भनकुण्ड और 8 नवंबर को मक्कूमठ स्थित ऐतिहासिक श्री मर्कटेश्वर मंदिर पहुंचेगी, जहां अगले छह महीनों तक शीतकाल के दौरान बाबा तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना संपन्न होगी। पंचकेदारों में शामिल तृतीय केदार तुंगनाथ धाम में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है, और अब भक्त शीतकाल में मक्कूमठ में उनके दर्शन कर सकेंगे।

