फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों पर हाई अलर्ट जारी, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; पेरिस में केंद्रीय मार्गों पर मार्च प्रतिबंधित
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों पर हाई अलर्ट जारी, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात; पेरिस में केंद्रीय मार्गों पर मार्च प्रतिबंधित
पेरिस। फ्रांस में महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर है। देशभर में करीब 70 हजार पुलिसकर्मी और जेंडरम तैनात किए गए हैं। राजधानी पेरिस में शहर के केंद्र से होकर गुजरने वाले मार्च पर पाबंदी लगा दी गई है और प्रदर्शनकारियों को बाहरी इलाकों में सीमित मार्गों पर ही मार्च की अनुमति दी गई है।
आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि पिछले सप्ताहों की हिंसा और लूटपाट को दोहराने से रोकने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है। इसमें बख्तरबंद वाहन, हेलीकॉप्टर, वाटर कैनन, ड्रोन और विशेष इकाइयां शामिल हैं। पेरिस में लौव्र, ओरसे समेत कई प्रमुख संग्रहालय एहतियातन बंद रखे गए और कई मेट्रो स्टेशन भी बंद किए गए। दुकानदारों ने दुकानों पर लकड़ी के बोर्ड लगा दिए।
प्रदर्शन महंगाई, ईंधन कीमतों, सार्वजनिक सेवाओं में कटौती और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर शुरू हुए थे। छात्र संगठनों से शुरू हुआ यह आंदोलन यूनियनों और येलो वेस्ट प्रदर्शनकारियों तक फैल गया। 17 अक्टूबर को पहले बड़े प्रदर्शन में पुलिस के अनुसार करीब 5.5 लाख लोग शामिल हुए, लेकिन बाद में हिंसा और लूटपाट हुई। इसके बाद 24 अक्टूबर को भी करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। उस दिन देशभर में लगभग 4.10 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया (यूनियनों का आंकड़ा इससे अधिक था)। पेरिस में मुख्य मार्च को पोर्ट डी इटली से पोर्ट डी विन्सेन जैसे बाहरी मार्गों पर शिफ्ट कर दिया गया। शाम को कुछ झड़पें हुईं और करीब एक हजार गिरफ्तारियां हुईं।
31 अक्टूबर (हैलोवीन) को तीसरी लहर में फिर 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। पुलिस के अनुसार करीब 3.20 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया (युवा संगठनों का आंकड़ा लगभग पांच लाख)। पेरिस में मार्च को फिर शहर के बाहरी इलाकों (जैसे पोर्ट डी बैग्नोलेट से पोर्ट डी चैरेंटन) तक सीमित रखा गया। ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम को कुछ जगहों पर नकाबपोश समूहों से झड़पें हुईं। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। देशभर में 565 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं।
सरकार ने गैर-यूनियन प्रदर्शनों पर भी प्रतिबंध लगाने की कोशिश की है और हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और आने वाले दिनों में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

