उत्तराखंड

चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ के सीपू गांव पहुंचा पहला वाहन, आजादी के 79 साल बाद सड़क से जुड़ा गांव

चीन सीमा से सटे पिथौरागढ़ के सीपू गांव पहुंचा पहला वाहन, आजादी के 79 साल बाद सड़क से जुड़ा गांव

​उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा से सटी दारमा घाटी के सीपू गांव ने इतिहास रच दिया है। समुद्र तल से लगभग 11,820 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम गांव में आजादी के 79 साल बाद पहली बार सड़क के जरिए कोई वाहन पहुंचा है। गांव में गाड़ी पहुंचते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने इस पल को एक सपना पूरा होने जैसा बताया।

​24 करोड़ की लागत से बन रही है सड़क

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के जरिए तिदांग, मारछा और सीपू गांवों को जोड़ने के लिए लगभग 24 करोड़ रुपये की लागत से 10 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। जुलाई 2024 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल सीपू गांव तक अस्थायी रूप से रास्ता चालू कर दिया गया है। संपूर्ण सड़क परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत 6 मोटर पुलों का निर्माण भी किया जाएगा।

​ग्रामीणों को पैदल सफर से मिली मुक्ति

ग्राम प्रधान सरोजनी सीपाल और 85 वर्षीय पूर्व प्रधान सुंदर सिंह सीपाल ने बताया कि पहले ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। अब गाड़ी पहुंचने से बुजुर्गों और मरीजों को सबसे बड़ी राहत मिली है। हाल ही में गांव के 8-10 परिवार शीतकालीन प्रवास (माइग्रेशन) के लिए पहली बार गाड़ी में बैठकर धारचूला पहुंचे।

​पर्यटन और रोजगार को मिलेंगे नए पंख

सड़क सुविधा मिलने से दारमा घाटी में पर्यटन की अपार संभावनाएं बढ़ गई हैं। सीपू गांव में प्रसिद्ध मूर्तिकार डीआर सीपाल द्वारा बनाई गई स्वामी विवेकानंद और राजुला-सुनपति शौकयानी की प्रतिमाओं के अलावा महादेव गुफा, मिलती बाई ताल, पार्वती ताल, छू मापांग ताल और आंचरी ताल जैसे कई प्राकृतिक और धार्मिक स्थल हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब पर्यटक यहां आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

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