पाकिस्तान में अवैध अंग तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क? किडनी ट्रांसप्लांट से लेकर प्लेसेंटा निर्यात तक सामने आए गंभीर आरोप
पाकिस्तान में अवैध अंग तस्करी का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क? किडनी ट्रांसप्लांट से लेकर प्लेसेंटा निर्यात तक सामने आए गंभीर आरोप
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में अवैध मानव अंग व्यापार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क कथित तौर पर देश के भीतर अवैध ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी मरीजों और दूसरे देशों में मानव जैविक सामग्री की कथित सप्लाई तक फैला हुआ है। जून 2026 में इस्लामाबाद में प्लेसेंटा को वियतनाम भेजे जाने का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
187 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के एंटी-करप्शन सर्कल ने दो कथित बिचौलियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि वे ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों, दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करते थे।
इससे पहले इसी जांच के सिलसिले में इस्लामाबाद में एक डॉक्टर और उसकी मेडिकल टीम के कई सदस्यों को भी गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई थी। अधिकारियों के अनुसार, कथित नेटवर्क ने करीब 187 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए थे।
विदेशी मरीजों से लाखों की वसूली का आरोप
जांच में सामने आए दावों के अनुसार, कथित नेटवर्क विदेशी मरीजों से एक ट्रांसप्लांट के लिए करीब 21,500 से 36,000 अमेरिकी डॉलर तक वसूलता था। पाकिस्तानी मुद्रा में यह रकम लगभग 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बताई गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंग देने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को इस रकम का बेहद छोटा हिस्सा मिलता था। इससे गरीबी और कमजोर नियामकीय व्यवस्था के बीच अवैध अंग व्यापार के पनपने की तस्वीर सामने आती है।
प्लेसेंटा को लेकर भी सामने आया मामला
25 जून 2026 को FIA ने इस्लामाबाद में कथित मानव अंग तस्करी के मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इनमें तीन चीनी नागरिक और दो पाकिस्तानी नागरिक बताए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ताजा, सूखा और प्रोसेस्ड मानव प्लेसेंटा बरामद किया गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि यह सामग्री पेशावर, रावलपिंडी और लाहौर के अस्पतालों से लाई गई थी।
आरोप है कि प्लेसेंटा को कथित तौर पर भेड़ के अंगों के रूप में गलत लेबल करके विदेश भेजा जा रहा था और वियतनाम को इसका गंतव्य बताया गया।
अस्पतालों से जुड़े चैनल की भी जांच
इस मामले ने जांच एजेंसियों के सामने अवैध व्यापार का एक और पहलू रखा है। आरोपों के मुताबिक, नेटवर्क में स्थानीय बिचौलियों के साथ मेडिकल पेशेवर और अन्य मध्यस्थ भी शामिल हो सकते हैं। कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और आवश्यक मंजूरियों को दरकिनार कर ट्रांसप्लांट की व्यवस्था की जाती थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इस तरह के नेटवर्क में विदेशी मरीज और अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल हो जाते हैं, तो पूरी सप्लाई चेन कई देशों तक फैल सकती है। इससे अपराध की जांच और उसे रोकना एजेंसियों के लिए और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
गरीबी और कमजोर निगरानी बनी बड़ी चिंता
अवैध अंग व्यापार के पीछे आर्थिक मजबूरी को एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कथित तौर पर पैसों का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल किया जाता है, जबकि दूसरी ओर विदेशी मरीजों से बड़ी रकम वसूली जाती है।
हालिया कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि कथित नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन और उसमें शामिल लोगों की पहचान करने की है।
नोट: ऊपर दी गई जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और अधिकारियों के कथित बयानों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाएगी।
