हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान, बोले- ‘वंदे मातरम्’ का कोई बंटवारा अब स्वीकार नहीं
हरिद्वार में शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान, बोले- ‘वंदे मातरम्’ का कोई बंटवारा अब स्वीकार नहीं
हरिद्वार: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरिद्वार में संत समाज के बीच राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग के दबाव में राष्ट्रगीत को लेकर जो विभाजन हुआ, उसने आगे चलकर देश के विभाजन की जमीन तैयार की। उन्होंने संतों से अपील की कि अब ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाया जाना चाहिए और इसके किसी भी तरह के बंटवारे को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
इस दौरान मौजूद संत समाज ने भी राष्ट्रगीत को पूरा गाने का संकल्प दोहराया।
संन्यासी विद्रोह से ‘वंदे मातरम्’ तक का इतिहास बताया
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल में अकाल और अंग्रेजों के अत्याचार के दौर में अन्याय के खिलाफ संत समाज ने आवाज उठाई थी।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इसी संन्यासी विद्रोह की पृष्ठभूमि पर बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने आनंदमठ उपन्यास लिखा था। उन्होंने उपन्यास के पात्र भवानंद संन्यासी के जरिए ‘वंदे मातरम्’ की उत्पत्ति और भारत माता की वंदना से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस गीत में मातृभूमि को मां के रूप में नमन किया गया है और संन्यासियों के लिए देश ही सर्वोच्च माता-पिता और परिवार था।
‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के लिए संतों से मांगा समर्थन
हरिद्वार दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर भी संत समाज का समर्थन मांगा। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास कार्यों में बाधा बनते हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि लगातार चुनावों के कारण शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी चुनावी ड्यूटी में लगाए जाते हैं, जिससे उनके नियमित काम प्रभावित होते हैं। इसके अलावा चुनावों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय संसाधन भी खर्च होते हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने संतों से अपील की कि वे लोगों को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के फायदे समझाएं और इसके समर्थन में जनमत तैयार करने में भूमिका निभाएं।
