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सतलुज में जहरीला कचरा मिलने से हड़कंप, रोपड़ में पहली FIR दर्ज; हिमाचल की फैक्ट्रियों पर आरोप

सतलुज में जहरीला कचरा मिलने से हड़कंप, रोपड़ में पहली FIR दर्ज; हिमाचल की फैक्ट्रियों पर आरोप

रोपड़: पंजाब के रोपड़ में सतलुज नदी का पानी प्रदूषित होने के मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए पहली FIR दर्ज की है। आरोप है कि हिमाचल प्रदेश के बद्दी और नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला औद्योगिक कचरा और रसायन नदी के पानी को दूषित कर रहे हैं। कार्रवाई रोपड़ से आम आदमी पार्टी के विधायक दिनेश चड्ढा की शिकायत के बाद की गई है।

सतलुज में बढ़ा प्रदूषण, पानी में दिखी गंदगी

भारी बारिश के बाद सतलुज नदी में बड़ी मात्रा में मटमैला और संदिग्ध औद्योगिक कचरा पहुंचने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों ने नदी के पानी में तैरती गंदगी और दुर्गंध की शिकायत की।

बताया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश से बहकर आया दूषित पानी सतलुज के अलावा सरहिंद नहर और बिस्त दोआब नहर तक भी पहुंच गया है। इससे पेयजल आपूर्ति और नदी के जलीय जीवन को लेकर चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे विधायक

रविवार सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान स्थानीय लोगों ने नदी की स्थिति देखी और इसकी जानकारी विधायक दिनेश चड्ढा को दी। सूचना मिलने के बाद विधायक मौके पर पहुंचे और नदी के पानी का जायजा लिया।

स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्होंने पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराया। इसके आधार पर बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र की कथित तौर पर प्रदूषण फैलाने वाली अज्ञात फैक्ट्रियों और उनके प्रबंधकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

FIR दर्ज होने के बाद विधायक ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि नदी में इतने बड़े स्तर पर प्रदूषण फैल रहा था तो प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई।

दिनेश चड्ढा ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भूमिका को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ जमीन पर प्रभावी और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नदी में प्रदूषण का स्रोत क्या है और इसके लिए कौन-कौन से औद्योगिक प्रतिष्ठान जिम्मेदार हैं।

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