अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘राम दरबार’ के लिए वीआईपी पास खत्म, संतों ने फैसले को बताया ऐतिहासिक और सराहनीय
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में ‘राम दरबार’ के लिए वीआईपी पास खत्म, संतों ने फैसले को बताया ऐतिहासिक और सराहनीय
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में राम दरबार के दर्शन के लिए लागू वीआईपी पास (VIP Pass) व्यवस्था को समाप्त किए जाने के निर्णय का अयोध्या के संतों और महंत्तों ने जोरदार स्वागत किया है। संतों ने इसे राम भक्तों के बीच समानता, पारदर्शिता और सुगम दर्शन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
1. संतों की प्रतिक्रिया: “भगवान के दरबार में सब समान”
महंत विजय दास (कंचन भवन): उन्होंने ट्रस्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला किसी ठोस कारण और आम श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। अब देश-विदेश से आने वाले भक्त बिना किसी भेदभाव के रामलला और राम दरबार के दर्शन कर सकेंगे।
कल्कि राम (अध्यक्ष, रामादल ट्रस्ट): उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर से वीआईपी और वीवीआईपी कल्चर पूरी तरह खत्म होना चाहिए ताकि सामान्य कतार में खड़े श्रद्धालु के मन में हीन भावना न आए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अयोध्या को पूरे देश के मंदिरों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
2. स्थानीय निवासियों और दिव्यांगों के लिए विशेष छूट
राहत बरकरार: संतों ने स्पष्ट किया कि वीआईपी कल्चर समाप्त होना चाहिए, लेकिन दिव्यांग श्रद्धालुओं और अयोध्या के स्थानीय निवासियों के लिए जो विशेष और सुगम दर्शन व्यवस्थाएं हैं, वे जारी रहनी चाहिए।
3. समानता के संदेश के अनुरूप फैसला
दिवाकर आचार्य का वक्तव्य: उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए सवाल उठाया कि मंदिरों में वीआईपी संस्कृति की शुरुआत किसने की। उन्होंने कहा कि सच्चे भक्तों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था जबकि कुछ लोगों को विशेषाधिकार मिलता था। यह निर्णय भगवान श्रीराम के समरसता और समानता के आदर्शों के बिल्कुल अनुकूल है।
