नंदा देवी राजजात: होमकुंड में विशेष पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ मुख्य पड़ाव संपन्न
नंदा देवी राजजात: होमकुंड में विशेष पूजा और चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई के साथ मुख्य पड़ाव संपन्न
उत्तराखंड की प्रसिद्ध और कठिन नंदा देवी बड़ी जात (राजजात) यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक चरण पूरा हो गया है। हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच पंचगंगा स्थित पवित्र होमकुंड में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद यात्रा के मुख्य पड़ाव संपन्न हो गए हैं। इस दौरान चौसिंगा खाड़ुओं को कैलाश के लिए विदाई दी गई।
होमकुंड में विशेष पूजा और अनुष्ठान
शीला समुद्र से विदाई: 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान और पूजा-अर्चना के बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की डोलियां-छंतोलियां तथा तीन चौसिंगा खाड़ू होमकुंड के लिए रवाना हुए थे।
वैदिक मंत्रोच्चार: त्रिशूली और नंदा घुंघटी की तलहटी में स्थित होमकुंड पहुंचते ही पूरा क्षेत्र नंदा देवी के जयकारों से गूंज उठा। पुजारी मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़ और प्रवीण गौड़ ने विधि-विधान से नंदा-भगवती की विशेष पूजा संपन्न कराई।
प्रमुख उपस्थिति: इस अवसर पर बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पदाधिकारी मौजूद रहे।
भावुक क्षण: चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई
होमकुंड में पूजा के बाद सबसे भावुक रस्म चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश विदाई की हुई।
यात्रा के साथ चल रहे तीनों खाड़ुओं को सजाया गया और उनकी पीठ पर पवाड़े के रूप में खाजा, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल, आभूषण और श्रृंगार सामग्री रखी गई।
वैदिक मंत्रोच्चार और नंदा देवी के जयकारों के बीच खाड़ुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया, जिसे देखकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
वापसी यात्रा और आगामी कार्यक्रम
पड़ावों से वापसी: होमकुंड से लौटते हुए यात्रा जामुन डाली, तातड़ और सुतोल गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने देव डोलियों का भव्य स्वागत किया। करीब 280 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करने के बाद भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
देवराड़ा-थराली वापसी: दूसरी ओर, देवराड़ा-थराली की उत्सव डोली ल्वाणी, कांडे, बमणबेरा, उलंग्रा, हाट कल्याणी, इच्छोली, अठ्ठू और बेराधार से होते हुए सिरमथल, टुंड्री और गोठिंड़ा की ओर बढ़ रही है।
यात्रा का समापन: नंदा देवी की डोलियां और छंतोलियां अब सिद्धपीठ कुरूड़ की वापसी यात्रा पर हैं। 23 सितंबर को कुरूड़ पहुंचने पर भव्य यज्ञ-अनुष्ठान और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा-2026 का विधिवत समापन किया जाएगा।
