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बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामला: मुख्य आरोपी एनकाउंटर में घायल, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से बदसलूकी मामला: मुख्य आरोपी एनकाउंटर में घायल, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार

​बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्रा और उसके साथी के साथ हुई कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार सुबह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मुख्य आरोपी घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में अब तक दो मुख्य आरोपियों समेत कई लोगों को पकड़ा जा चुका है।

​पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ की मुख्य बातें

​घटना और एसआईटी का गठन: जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के अनुसार, 21 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के जरिए इस घटना की जानकारी मिली थी। 19 सितंबर की शाम जमुई थाना क्षेत्र के मारवा और प्रतापपुर के बीच पहाड़ी इलाके में यह घटना घटी थी। पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और उसी दिन तीन नाबालिगों को निरुद्ध कर लिया था।

​मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और मुठभेड़: मंगलवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस को सूचना मिली कि दो मुख्य आरोपी प्रतापपुर गांव के पास नदी के बहियार में छिपे हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर पहले हरे राम यादव को पकड़ा। उसकी निशानदेही पर दूसरे मुख्य आरोपी नंदन यादव की तलाश की गई। तलाशी के दौरान नंदन यादव ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके जवाब में की गई कार्रवाई में वह घायल हो गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया है।

​आपराधिक पृष्ठभूमि: पुलिस के मुताबिक, दोनों मुख्य आरोपी बालिग हैं और उनके अवैध बालू व शराब के कारोबार से जुड़े होने की बात भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है।

​पीड़ितों की पहचान उजागर करने वालों पर शिकंजा

​पुलिस ने सोशल मीडिया पर नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए हैं:

​जमुई साइबर थाने में कांड संख्या 45/2026 दर्ज किया गया है।

​नियमों का उल्लंघन कर पहचान उजागर करने वाले लगभग 120 सोशल मीडिया प्रोफाइलों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

​इनमें से 3 उपयोगकर्ताओं को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।

​एसपी विश्वजीत दयाल ने आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की है कि वे पीड़ितों की पहचान या उससे जुड़ा कोई भी संवेदनशील वीडियो/सामग्री ऑनलाइन साझा न करें, क्योंकि इससे पीड़ितों को गंभीर मानसिक और सामाजिक क्षति पहुंच सकती है। पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी हुई है।

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