बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना 2 साल बाद पहली बार आईं सामने: वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में रोते हुए बोलीं—”बांग्लादेश लौटूंगी, 10,000 लोग मारे गए”
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना 2 साल बाद पहली बार आईं सामने: वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में रोते हुए बोलीं—”बांग्लादेश लौटूंगी, 10,000 लोग मारे गए”
नई दिल्ली: अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने और भारत आने के ठीक दो साल बाद (अगस्त 2026), बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर वर्चुअल माध्यम से सामने आईं। दिल्ली में आयोजित ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (FCC) साउथ एशिया’ के एक कार्यक्रम में बिना कैमरा ऑन किए केवल अपनी आवाज के जरिए उन्होंने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर दर्द साझा किया और देश वापस लौटने का ऐलान किया।
1. बांग्लादेश वापसी की घोषणा और भावुक अपील
दिसंबर में वापसी के संकेत: शेख हसीना ने कहा, “मुझे मेरे देश से दूर कर दिया गया, लेकिन मैं अपने लोगों से कभी अलग नहीं हुई। मैं अपने प्यारे देश वापस लौटना चाहती हूँ और शायद इस साल दिसंबर में बांग्लादेश जाऊँगी।”
आँसुओं के साथ दर्द बयां किया: देश के बिगड़े हालातों का जिक्र करते हुए वह रो पड़ीं और कहा कि पिछले दो सालों से वह बांग्लादेश को पीड़ित होते देख रही हैं। यह वह देश नहीं है जिसके निर्माण के लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने शहादत दी थी।
2. हिंसा और राजनीतिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप
छात्र आंदोलन नहीं, राजनीतिक साजिश: उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि वह कोई शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन नहीं था, बल्कि कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदल दिया था।
बड़े पैमाने पर मौतें और गिरफ्तारियां: शेख हसीना का दावा है कि उनके जाने (5 अगस्त 2024) के बाद से अब तक 10,000 से अधिक लोग मारे गए या लापता हुए हैं। पिछले दो वर्षों में लगभग 6.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अवामी लीग के 4.5 लाख से अधिक नेताओं व कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
खुद पर 600 से अधिक केस: उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ 600 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि उनकी पार्टी अवामी लीग, यूथ लीग और महिला कार्यकर्ताओं को जेलों में अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
3. मुक्ति संग्राम के प्रतीकों और ‘बंगबंधु’ के अपमान पर दुख
विरासत को पहुंचाया गया नुकसान: पूर्व पीएम ने आरोप लगाया कि 1971 के मुक्ति संग्राम (Liberation War) के तमाम निशानों और स्मारकों को तबाह कर दिया गया है।
बंगबंधु मेमोरियल ध्वस्त: बांग्लादेश के राष्ट्रपिता ‘बंगबंधु’ शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक आवास (बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम) को गिरा दिया गया और आजादी के सेनानियों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया है।
