Thursday, August 6, 2026
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चंद्रमा से टकराया स्पेस-एक्स रॉकेट का टुकड़ा: सतह पर बना नया गड्ढा (क्रेटर)

चंद्रमा से टकराया स्पेस-एक्स रॉकेट का टुकड़ा: सतह पर बना नया गड्ढा (क्रेटर)

​नई दिल्ली: अंतरिक्ष में पिछले एक साल से तैर रहा स्पेस-एक्स (SpaceX) के फैल्कन-9 रॉकेट का एक विशालकाय टुकड़ा आज यानी बुधवार, 5 अगस्त (2026) को चंद्रमा की सतह से टकरा गया। लगभग 4,000 किलोग्राम वजनी और एक स्कूल बस के आकार का यह रॉकेट का दूसरा चरण (Second Stage) भारतीय समयानुसार दोपहर 12:05 बजे करीब 8,690 किमी/घंटा की भीषण रफ्तार से चांद से टकराया।

​1. टक्कर और उसका प्रभाव

​नया क्रेटर और धूल का गुबार: इस तीव्र टक्कर से चंद्रमा की सतह पर एक नया गड्ढा (क्रेटर) बन गया है और धूल का गुबार उठा।

​धरती से देखना असंभव: रॉकेट का यह टुकड़ा चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित ‘आइंस्टीन क्रेटर’ (Einstein Crater) के पास टकराया। इस वजह से इसे पृथ्वी से नंगी आंखों से देखना संभव नहीं था।

​धरती को कोई खतरा नहीं: वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इस घटना से पृथ्वी या उसके वायुमंडल को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।

​2. क्यों और कैसे अंतरिक्ष में भटक रहा था यह टुकड़ा?

​जनवरी 2025 का मिशन: द गार्डियन के अनुसार, इस रॉकेट ने जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस के लूनर लैंडर को चंद्रमा की ओर भेजा था।

​अंतरिक्ष में छूटने का कारण: आमतौर पर रॉकेट के बूस्टर या स्टेज पृथ्वी के वायुमंडल में लौटकर जल जाते हैं या समुद्र में गिर जाते हैं। हालांकि, चंद्रमा के इस गहरे अंतरिक्ष मिशन के लिए अत्यधिक थ्रस्ट (जोर) की आवश्यकता थी, जिसके कारण रॉकेट का दूसरा चरण कक्षा में ही छूट गया और पिछले एक साल से अंतरिक्ष के मलबे के बीच भटक रहा था।

​3. वैज्ञानिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण अवसर

​वैज्ञानिक इस घटना को एक दुर्लभ अध्ययन अवसर के रूप में देख रहे हैं। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि मानव-निर्मित कृत्रिम वस्तुएं (Artificial Objects) खगोलीय पिंडों से टकराने पर कैसा प्रभाव डालती हैं। साथ ही, यह घटना अंतरिक्ष में जमा हो रहे मलबे (Space Debris) की ट्रैकिंग और उसके प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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