भनियावाला-ऋषिकेश सड़क परियोजना: राहुल गांधी की एंट्री के बाद बैकफुट पर धामी सरकार, 3000 पेड़ों के कटान पर लगी रोक; कांग्रेस ने बताया बड़ी जीत
भनियावाला-ऋषिकेश सड़क परियोजना: राहुल गांधी की एंट्री के बाद बैकफुट पर धामी सरकार, 3000 पेड़ों के कटान पर लगी रोक; कांग्रेस ने बताया बड़ी जीत
उत्तराखंड के भनियावाला और ऋषिकेश के बीच प्रस्तावित फोर/सिक्स लेन सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले कई दिनों से स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों के भारी विरोध के बीच, राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 3,000 पेड़ों के कटान पर फिलहाल पूरी तरह से रोक (स्थगन) लगा दी है। सरकार का कहना है कि जब तक सभी पक्षों के साथ संतोषजनक सहमति नहीं बन जाती, तब तक पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी।
इस फैसले के बाद उत्तराखंड में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी के हस्तक्षेप का असर बताते हुए धामी सरकार के ‘बैकफुट’ पर आने का दावा किया है।
जनभावनाओं और संवाद के आधार पर आगे बढ़ेगी सरकार
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की इस महत्वपूर्ण परियोजना पर माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों और सभी वैधानिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि, बढ़ते जन-आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने अब अपने कदम पीछे खींचे हैं।
अधिकारियों को बातचीत के निर्देश: मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे सभी हितधारकों, स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ फिर से विस्तृत संवाद स्थापित करें।
सरकार का रुख: राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश का विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। उत्तराखंड की प्रकृति, जनता की भावनाएं और विकास—तीनों सरकार के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
वन्यजीव संरक्षण का था प्रावधान: गौरतलब है कि इस परियोजना में पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के आवागमन के लिए विशेष कल्वट (पुलिया) का प्रावधान किया गया था, ताकि इस मार्ग पर होने वाली वन्यजीवों की सड़क दुर्घटनाओं और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोका जा सके।
राहुल गांधी की एंट्री और अनिल जोशी के सवालों से बढ़ा दबाव
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब एक दिन पहले शुक्रवार रात को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने देहरादून दौरे के दौरान अचानक आंदोलन स्थल (‘सात मोड़’) पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी। राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों की सुध लेते हुए इस गंभीर मुद्दे को आगामी संसद सत्र में उठाने का भरोसा दिया था।
इसके अलावा, शनिवार सुबह देश के जाने-माने पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने भी इस परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिससे सरकार पर चौतरफा दबाव बेहद बढ़ गया।
राहुल गांधी के डर से पीछे हटी सरकार: कांग्रेस
पेड़ों के कटान पर रोक लगने के तुरंत बाद कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने बयान जारी कर कहा:
”सात मोड़ पर पिछले कई दिनों से लगातार पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा था और राज्य सरकार सोई हुई थी। बीते रोज प्रदर्शन कर रहे पर्यावरण प्रेमियों ने राहुल गांधी का काफिला रोका और उनसे प्रकृति को बचाने की गुहार लगाई। राहुल गांधी ने जैसे ही इस मुद्दे को देश की संसद में उठाने का आश्वासन दिया, वैसे ही धामी सरकार घबराकर बैकफुट पर आ गई। इसी डर के कारण सरकार को पेड़ों का कटान तत्काल प्रभाव से रोकना पड़ा है।”
फिलहाल, पेड़ों की कटाई रुकने से आंदोलनकारियों और पर्यावरणविदों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और हितधारकों के बीच होने वाले आगामी संवाद से क्या बीच का रास्ता निकलता है।
