रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे से हटे निहंग, भाकपा (माले) ने जताया चुनावी ध्रुवीकरण का शक; कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच
रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे से हटे निहंग, भाकपा (माले) ने जताया चुनावी ध्रुवीकरण का शक; कांग्रेस ने मांगी निष्पक्ष जांच
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू में स्थित एक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर पिछले चार दिनों से कब्जा जमाए बैठे निहंग सिख मंगलवार को वहां से चले गए। हालांकि, इस घटना के बाद राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलकों में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भाकपा (माले) और कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य की भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई है।
भाकपा (माले) उत्तराखंड के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने एक प्रेस बयान जारी कर आशंका जताई है कि कहीं यह पूरा घटनाक्रम पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कूटनीतिक ध्रुवीकरण का कोई बड़ा षड्यंत्र तो नहीं है, जिसमें दोनों राज्यों की जनता को मोहरा बनाया जा रहा हो। वहीं, कांग्रेस ने कर्णप्रयाग और नगरासू दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों पर रोक लगाने की बात कही है।
कर्णप्रयाग हिंसा की जांच हरिद्वार ट्रांसफर करने पर उठाए सवाल
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग सिख यात्रियों और स्थानीय युवाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले में सिख पक्ष की क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस झड़प में एक स्थानीय युवक गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसे एयरलिफ्ट कर देहरादून भेजना पड़ा था। मैखुरी ने कहा कि क्रॉस एफआईआर कराना दूसरे पक्ष का कानूनी अधिकार है और इसका फैसला अदालत करेगी।
लेकिन, उन्होंने उत्तराखंड सरकार और पुलिस द्वारा चमोली जिले के कर्णप्रयाग की इस घटना की जांच अचानक हरिद्वार ट्रांसफर किए जाने पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि स्थानीय पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती? मैखुरी ने पूछा कि अगर जांच जिले से बाहर भेजनी ही थी, तो पास के रुद्रप्रयाग, पौड़ी या टिहरी जिले को छोड़कर सीधे हरिद्वार ही क्यों चुना गया? क्या पुलिस अधिकारियों को उनकी योग्यता और पद के बजाय उनके धर्म और मूल के नजरिए से देखा जा रहा है?
नगरासू और कर्णप्रयाग की घटनाओं को जोड़ने पर जताई आपत्ति
इंद्रेश मैखुरी ने नगरासू गुरुद्वारे पर कब्जा करने वाले निहंगों को कर्णप्रयाग की हिंसा से जोड़े जाने पर भी नाखुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नगरासू गुरुद्वारे के प्रबंधक के अनुसार, कब्जा करने वालों का गुरुद्वारे के स्टाफ से झगड़ा हुआ था, जिसके बाद उन्होंने ऊपरी मंजिल पर कब्जा कर लिया। ऐसे में इस घटना का कर्णप्रयाग मामले से कोई सीधा संबंध नजर नहीं आता। उन्होंने शक जताया कि कहीं कर्णप्रयाग की घटना को अपनी अतिवादी कार्रवाई के बचाव के लिए एक कवच के रूप में तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यदि किसी अन्य धर्म के अनुयायी ने इस तरह किसी धर्मस्थल पर कब्जा किया होता, तो क्या उत्तराखंड पुलिस इतनी ही उदारता दिखाती?
कांग्रेस ने कहा- उत्तराखंड और पंजाब के रिश्तों को खराब करने की कोशिश रोकें
दूसरी तरफ, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश नेगी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इस घटना को सांप्रदायिक रंग देकर उत्तराखंड और पंजाब के बीच विवाद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि चारधाम यात्रा के दौरान देश भर से श्रद्धालु उत्तराखंड आते हैं और हमारी संस्कृति “अतिथि देवो भव” की भावना पर टिकी है। इसलिए सरकार को कानून के दायरे में रहकर निष्पक्षता से काम करना चाहिए। इस पत्रकार वार्ता में विपिन फरसवान, योगेंद्र सिंह और गोबिंद सजवाण सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
पेपर लीक मामलों को लेकर भी सरकार पर बरसी कांग्रेस
इस दौरान कांग्रेस ने देश और राज्य में चल रहे पेपर लीक विवादों को लेकर भी सरकार को घेरा। चमोली जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश डिमरी ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ देश भर के छात्रों के हित में “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कांग्रेस ने मांग की कि सभी सरकारी भर्तियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएं।
थराली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता जीत राम टम्टा ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि युवाओं को सुरक्षित भविष्य देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि अब तक हुए तमाम पेपर लीक मामलों में सरकार या उससे जुड़े संदिग्ध लोगों की भूमिका की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
