रुद्रप्रयाग गुरुद्वारा विवाद: 24 घंटे बाद भी छत पर डटे हैं निहंग सिख, 10-12 हजार श्रद्धालुओं का लंगर रुका; संचालक बोले- ‘वे असली निहंग नहीं’
रुद्रप्रयाग गुरुद्वारा विवाद: 24 घंटे बाद भी छत पर डटे हैं निहंग सिख, 10-12 हजार श्रद्धालुओं का लंगर रुका; संचालक बोले- ‘वे असली निहंग नहीं’
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में नगरासू स्थित गुरुद्वारे में चल रहा निहंग सिख विवाद 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जस का तस बना हुआ है। गुरुद्वारे की छत पर चढ़े निहंग सिख लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इस गतिरोध के कारण गुरुद्वारा प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और आम लोगों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं।
गुरुद्वारा संचालक का दावा— “ये नकली निहंग हैं, एक श्रद्धालु को बनाया बंधक”
तनावपूर्ण स्थिति के बीच गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (पत्रकार वार्ता) कर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
पहचान पर सवाल: बेहंत सिंह का दावा है कि छत पर चढ़े लोग वास्तविक या मान्यता प्राप्त निहंग सिख नहीं हैं। असली निहंग सिख किसी न किसी पंजीकृत (रजिस्टर्ड) संगठन या समिति से जुड़े होते हैं, जबकि इनका किसी अधिकृत संस्था से कोई संबंध नहीं है।
बंधक बनाने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने गुरुद्वारे के भीतर एक लगभग 60 वर्षीय बुजुर्ग श्रद्धालु को बंधक बनाकर रखा हुआ है, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।
क्या हैं निहंगों की मांगें?
जानकारी के अनुसार, छत पर डटे लोग प्रशासन के सामने दो मुख्य शर्तें रख रहे हैं:
16 जून को कर्णप्रयाग में हुई एक घटना के सिलसिले में जेल भेजे गए तीन निहंग सिखों को तुरंत रिहा किया जाए।
उनके खिलाफ दर्ज किए गए सभी मुकदमों और कानूनी मामलों को वापस लिया जाए।
10 से 12 हजार श्रद्धालु प्रभावित, लंगर का सामान हो रहा खराब
इस विवाद का सबसे बड़ा असर गुरुद्वारे आने वाले आम श्रद्धालुओं और धार्मिक व्यवस्थाओं पर पड़ा है:
सुरक्षा कारणों के चलते गुरुद्वारे में आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है।
आम दिनों में यहाँ रोजाना 10 से 12 हजार श्रद्धालु मत्था टेकने और लंगर छकने आते थे। आवाजाही बंद होने से लंगर के लिए तैयार की गई भारी मात्रा में खाद्य सामग्री (राशन) अब खराब होने लगी है।
प्रशासनिक पहल: पुलिस अधीक्षक (SP) नीहारिका तोमर ने खुद फोन के जरिए छत पर मौजूद लोगों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासन मुस्तैदी से हालात पर नजर बनाए हुए हैं और इस गतिरोध को शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त करने के लिए अगली रणनीति तैयार कर रहे हैं।
