Sunday, June 21, 2026
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​एक तरफ स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता, दूसरी तरफ ट्रंप की ईरान को खुली धमकी— “प्रॉक्सी को रोके, वरना पिछले हफ्ते से भी जोरदार हमला करेंगे”

​एक तरफ स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता, दूसरी तरफ ट्रंप की ईरान को खुली धमकी— “प्रॉक्सी को रोके, वरना पिछले हफ्ते से भी जोरदार हमला करेंगे”

​वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों के बीच एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। स्विट्जरलैंड में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय शांति वार्ता चल रही है, लेकिन इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद आक्रामक बयान जारी किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर ईरान पर फिर से बड़ा सैन्य हमला करने की सीधी धमकी दी है।

​ट्रंप की दोटूक चेतावनी— “प्रॉक्सी रोके ईरान”

​राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लेबनान के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए ईरान को चेतावनी दी:

​”ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी (हिज्बुल्लाह) को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत जोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि उससे भी ज्यादा जोरदार।”

​ईरान ने दी ‘होर्मुज स्ट्रेट’ बंद करने की धमकी

​ट्रंप के इस बयान से पहले शनिवार को ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने भी कड़ा रुख अपनाया था:

​होर्मुज स्ट्रेट पर संकट: ईरान ने लेबनान में इजरायली हमलों के विरोध में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी है।

​अमेरिका पर आरोप: तेहरान ने अमेरिका पर “बदनीयती” से काम करने और युद्ध खत्म करने के अपने वादों से मुकरने का आरोप लगाया है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर आक्रामकता जारी रही, तो उसने आगे के कड़े कदम उठाने की योजना तैयार कर ली है।

​स्विट्जरलैंड में आमने-सामने बैठे जेडी वेंस और ईरानी अधिकारी

​तनाव और बयानबाजी के इस माहौल के बीच स्विट्जरलैंड के पहाड़ी इलाके में ल्यूसर्न झील के पास एक रिजॉर्ट में बातचीत का दौर भी जारी रहा:

​शीर्ष नेताओं की बैठक: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस बैठक के दौरान ईरान के शीर्ष वार्ताकारों—संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से सीधी मुलाकात की।

​मध्यस्थ रहे मौजूद: इस सीधी बातचीत के दौरान मध्यस्थ देश पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि भी वहां मुस्तैद रहे।

​बातचीत के केंद्र में इजरायल-लेबनान युद्ध और परमाणु कार्यक्रम

​लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लड़ाकों के बीच जारी संघर्ष ने अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

​अमेरिका जहां एक तरफ तेहरान से उसके परमाणु कार्यक्रम पर रियायतें हासिल करना चाहता है और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना चाहता है।

​वहीं दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि रविवार को हुई इस बातचीत के दौरान ईरान का मुख्य फोकस इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे भीषण युद्ध को रुकवाने पर ही केंद्रित था।

​मुख्य बात: स्विट्जरलैंड की मेज पर चल रही कूटनीति और जमीन पर डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध की धमकी ने इस शांति वार्ता के भविष्य पर संशय के बादल मंडरा दिए हैं। अब देखना होगा कि 60 दिनों की इस सख्त समय-सीमा के भीतर दोनों देश किसी ठोस समझौते पर पहुंच पाते हैं या नहीं।

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