केरल में अवैध अंग तस्करी का भंडाफोड़: ED ने 9 ठिकानों पर की छापेमारी, मेडिकल टूरिज्म की आड़ में चल रहा था करोड़ों का खेल
केरल में अवैध अंग तस्करी का भंडाफोड़: ED ने 9 ठिकानों पर की छापेमारी, मेडिकल टूरिज्म की आड़ में चल रहा था करोड़ों का खेल
कोच्चि: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केरल में सक्रिय एक बड़े और संगठित अवैध अंग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ 18 जून को एक बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED की टीमों ने केरल में 9 अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाना है कि मानव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त से कमाए गए करोड़ों रुपये कहां ठिकाने लगाए गए और इस सिंडिकेट में कौन-कौन से रसूखदार लोग शामिल हैं।
केरल पुलिस की FIR के बाद ED ने संभाली कमान
यह मामला तब सामने आया जब केरल पुलिस ने अंग तस्करी को लेकर एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। पुलिस की शुरुआती जांच से साफ हुआ कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं बल्कि एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट है, जो अंग दान (Organ Donation) के नाम पर किडनी व अन्य अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त कर रहा था। इसके बाद मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल देखते हुए ED ने जांच अपने हाथ में ली।
’कल्लाथरस मेडिकल टूरिज्म’ के जरिए 5 साल से चल रहा था खेल
ED की जांच में इस नेटवर्क के मुख्य चेहरों और उनकी कार्यप्रणाली का खुलासा हुआ है:
मुख्य आरोपी: इस नेटवर्क का मुख्य सरगना मोहम्मद नजीब के और उसकी सहयोगी रशीदा ए.ए. हैं।
मोडस ऑपेरैंडी: दोनों ने अपनी कंपनी ‘कल्लाथरस मेडिकल टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए साल 2021 से 2026 के बीच इस पूरे नेटवर्क को चलाया।
मरीजों और डोनर्स का शोषण: गिरोह के बिचौलिये गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर फंसाते थे। डोनर को अंग के बदले 5 से 15 लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि जरूरतमंद मरीजों से 20 से 35 लाख रुपये या उससे भी अधिक रकम वसूली जाती थी।
फर्जी दस्तावेज बनाने के लिए चल रहे थे बाकायदा ‘स्टूडियो’
जांच में सामने आया कि पूरे खेल को कानूनी और वैध दिखाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जाता था:
आरोपियों ने पुलिस द्वारा जारी होने वाले फर्जी अल्ट्रुइज्म सर्टिफिकेट (परोपकारिता प्रमाण पत्र), जनप्रतिनिधियों की जाली सिफारिशी चिट्ठियां, राशन कार्ड और सरकारी पहचान पत्रों की नकली प्रतियां (कॉपी) तैयार की थीं।
इन फर्जी कागजातों को तैयार करने के लिए एर्नाकुलम के पल्लिक्कारा इलाके में स्थित ‘सन कम्युनिकेशन डीटीपी सेंटर’ और ‘साइन एचडी डिजिटल स्टूडियो’ का इस्तेमाल किया जाता था। इन्हीं जाली दस्तावेजों के दम पर एर्नाकुलम के बड़े अस्पतालों में अवैध तरीके से अंग प्रत्यारोपण (Transplant) करा दिए जाते थे।
संपत्तियां और बैंक खाते फ्रीज, मनी ट्रेल की जांच शुरू
ED ने छापेमारी के दौरान अस्पतालों और जिला स्तरीय ऑथराइजेशन कमेटी में जमा कराए गए रिकॉर्ड, डोनर-रिसीवर की लिस्ट और कई जाली दस्तावेज जब्त किए हैं।
बड़ी कार्रवाई: जांच एजेंसी ने कई एजेंटों और बिचौलियों के बैंक खातों को फ्रीज (लेन-देन पर रोक) कर दिया है।
अपराध की कमाई: मुख्य आरोपियों और उनकी संस्थाओं के बैंक खातों की पूरी डिटेल निकालकर मनी ट्रेल (पैसे के बहाव) को खंगाला जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपियों ने इस अवैध कमाई से कितनी अचल संपत्तियां खरीदी हैं।
आगे की कार्रवाई: प्रवर्तन निदेशालय का मानना है कि इस रैकेट के तार मेडिकल क्षेत्र के कुछ अन्य बड़े नामों से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है और आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
